90 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुके स्कूल भवनों के निर्माण के लिए विधायक ने मांगा बजट
मुख्यमंत्री बोले- 80 फीसदी से ऊपर के सभी कार्यों के लिए धन उपलब्ध करवाएगी सरकार
सदन में सदस्यों से अधूरे कार्यों के प्रस्ताव भेजने का आग्रह
शिमला। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 80 फीसदी से अधिक पूरा हो चुके विकास कार्यों को पूरा करने के लिए बजट में 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने सदन में मौजूद सभी विधायकों से ऐसे कार्यों के लिए धन की मांग भेजने का आग्रह किया, ताकि अधूरे भवनों और अन्य विकास परियोजनाओं को जल्द पूरा किया जा सके।
सदन में विधायक मोहनलाल ने शिक्षा संस्थानों से जुड़े अधूरे निर्माण कार्यों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में माध्यमिक विद्यालयों और अन्य शिक्षा संस्थानों से संबंधित कई भवनों का निर्माण कार्य 90 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है, लेकिन शेष काम बजट के अभाव में अटका हुआ है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इन कार्यों के लिए आवश्यक धन उपलब्ध करवाने की मांग की।
90 प्रतिशत काम पूरा, फिर भी भवन अधूरे
विधायक ने कहा कि कई शिक्षा संस्थानों की इमारतों का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। ऐसे में थोड़े से काम के लिए पूरी परियोजना अधूरी पड़ी है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि जिन संस्थानों का निर्माण 90 प्रतिशत या उससे अधिक पूरा हो चुका है, उनके लिए शेष राशि उपलब्ध करवाई जाए, ताकि भवनों को उपयोग में लाया जा सके।
विशेष केंद्रीय योजना से धन देने का सुझाव
विधायक ने सुझाव दिया कि जिन परियोजनाओं का निर्माण कार्य 90 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है, उन्हें विशेष केंद्रीय योजना के तहत भी धन उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जाए। इससे लंबे समय से लंबित शिक्षा संस्थानों के निर्माण कार्य पूरे हो सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा- प्रस्ताव भेजें, भवन पूरे करवाए जाएंगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने ऐसे अधूरे कार्यों को प्राथमिकता दी है। बजट में 80 फीसदी से अधिक पूरा हो चुके कार्यों के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि सदन में मौजूद सभी सदस्य अपने-अपने क्षेत्रों में 80 प्रतिशत से अधिक पूरे हो चुके कार्यों के प्रस्ताव और धन की मांग सरकार को भेजें। आवश्यक धन उपलब्ध करवाकर इन भवनों को पूरा किया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे शिक्षा संस्थानों के भवन हों या स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े निर्माण कार्य, जो परियोजनाएं काफी हद तक पूरी हो चुकी हैं, उन्हें अधूरा नहीं छोड़ा जाएगा।











