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हाइड्रो प्रोजेक्ट बनने के बाद भी हो निगरानी, प्रभावित लोगों को मिले उनका हक : हंस राज

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चंबा की जलविद्युत परियोजनाओं से विकास के साथ पर्यावरण और सामाजिक बदलाव का मुद्दा सदन में उठा

27 हजार मेगावाट क्षमता में से 11-12 हजार मेगावाट का दोहन, अकेले चंबा से 1700-1800 मेगावाट उत्पादन


शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में जलविद्युत परियोजनाओं से होने वाले पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का मुद्दा उठाते हुए विधायक हंस राज ने कहा कि हाइड्रो पावर ने प्रदेश के विकास और विद्युतीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन परियोजनाओं के कारण प्रभावित हुए स्थानीय लोगों के हितों की भी लगातार निगरानी होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि हाइड्रो परियोजना बनने के बाद उसके प्रभावों की समीक्षा के लिए सरकार की ओर से एक स्थायी कमेटी गठित की जाए।


हंस राज ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में करीब 27 हजार मेगावाट हाइड्रो पावर क्षमता का आकलन किया गया है, जिसमें से लगभग 11 से 12 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा चुका है। चंबा जिला भी प्रदेश के हाइड्रो पावर क्षेत्र में बड़ा योगदान दे रहा है और यहां से करीब 1700 से 1800 मेगावाट विद्युत उत्पादन किया जा रहा है।


हाइड्रो से विकास हुआ, लेकिन दूसरा पक्ष भी सामने आया


विधायक ने कहा कि हाइड्रो परियोजनाओं के कारण चंबा में सड़कें बनीं, स्थायी बाजार विकसित हुए और लोगों को रोजगार के अवसर मिले। देश के विद्युतीकरण और प्रदेश के विकास में इन परियोजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हालांकि, इसका दूसरा पक्ष भी है। परियोजनाओं के निर्माण से स्थानीय पारिस्थितिकी प्रभावित हुई, लोगों की जमीन गई और कई परिवारों को विस्थापन का सामना करना पड़ा।


उन्होंने कहा कि परियोजनाएं स्थापित करते समय स्थानीय लोगों से शिक्षा, सड़क और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं के विकास के वादे किए गए थे, लेकिन परियोजनाएं बनने के बाद इन वादों की निगरानी नहीं हो पाती। इसलिए यह देखना जरूरी है कि परियोजना के निर्माण के बाद स्थानीय क्षेत्र में सामाजिक और पर्यावरणीय स्थिति कैसी है तथा लोगों को वादे के अनुरूप सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं।


दशकों बाद भी प्रभावित परिवार लगा रहे गुहार


हंस राज ने Baira-Siul और Chamera परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से प्रभावित कई परिवार आज भी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के निर्माण के समय जिन लोगों से जमीन ली गई और जिन क्षेत्रों पर परियोजनाओं का प्रभाव पड़ा, उनके हितों की जिम्मेदारी परियोजना पूरी होने के बाद भी खत्म नहीं होनी चाहिए।


उन्होंने Chamera-I परियोजना का उदाहरण देते हुए कहा कि करीब 500 मेगावाट से अधिक क्षमता वाली इस परियोजना के कारण कई क्षेत्र प्रभावित हुए। पानी रोकने के कारण आसपास के क्षेत्रों में इसका प्रभाव पड़ा और कई स्थानों पर गाद व सिल्ट जमा होने से स्थानीय लोगों के लिए परेशानी पैदा हुई।


LADA और CSR राशि के इस्तेमाल पर पारदर्शिता की मांग


विधायक ने परियोजनाओं से मिलने वाली LADA और CSR राशि के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कंपनियों की ओर से विकास कार्यों के लिए दी जाने वाली राशि का कहां और किस तरह इस्तेमाल हो रहा है, इसकी जानकारी स्थानीय लोगों को मिलनी चाहिए।


उन्होंने आरोप लगाया कि इस संबंध में जानकारी हासिल करने के लिए कई बार प्रयास किए गए, लेकिन कुछ मामलों में तथाकथित लोग मिलकर राशि और कार्यों की व्यवस्था को प्रभावित करते हैं। उन्होंने विकास राशि के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।


डंपिंग साइट और पर्यावरणीय नुकसान की हो निगरानी


हंस राज ने कहा कि हाइड्रो परियोजनाओं के निर्माण के दौरान बड़ी मात्रा में मलबा निकलता है। इसके लिए निर्धारित डंपिंग साइट बनाई जाती हैं, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि मलबे का निस्तारण तय नियमों और स्थानों पर ही हो। उन्होंने कहा कि परियोजना क्षेत्रों में पर्यावरणीय नुकसान और स्थानीय लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव की समय-समय पर समीक्षा जरूरी है।


परियोजना बनने के बाद कमेटी करे नियमित समीक्षा


विधायक ने सरकार से मांग की कि हाइड्रो पावर परियोजना के निर्माण के बाद एक ऐसी कमेटी गठित की जाए, जो समय-समय पर परियोजना क्षेत्र का निरीक्षण करे। कमेटी यह देखे कि परियोजना से सामाजिक और पर्यावरण के स्तर पर क्या बदलाव आया है, स्थानीय लोगों को क्या लाभ मिल रहा है और किस तरह का नुकसान हो रहा है।


उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के लिए जमीन देने और पर्यावरणीय प्रभाव झेलने वाले स्थानीय लोगों को उस स्तर पर मुआवजा और सुविधाएं मिलनी चाहिए, जिनका उनसे वादा किया गया था। केवल परियोजना का निर्माण पूरा कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों की जिम्मेदारी उसके बाद भी बनी रहनी चाहिए।
स्थानीय युवाओं को मिले रोजगार और कौशल विकास का लाभ
हंस राज ने कहा कि हाइड्रो परियोजनाओं में स्थानीय युवाओं को रोजगार और कौशल विकास के अवसर मिलने चाहिए।

परियोजनाओं के निर्माण के समय बड़ी संख्या में कामगार बाहर से आते हैं, जबकि स्थानीय युवाओं को भी तकनीकी और अन्य कार्यों में अवसर दिए जाने चाहिए।।


उन्होंने कहा कि हाइड्रो पावर ने हिमाचल को विकास की नई दिशा दी है, लेकिन विकास का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचना भी जरूरी है। सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिसमें पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय हित, रोजगार और परियोजनाओं से मिलने वाले लाभों के बीच संतुलन कायम रहे।