Advertisement

लैंडस्लाइड प्रभावित गांवों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त बजट की मांग

Spread the love

सोलंग, खशेरी, दराल और सारी गांवों में भूस्खलन का खतरा, विधायक ने उठाया मामला


कृषि मंत्री बोले- छोटे बजट से छोटे काम ही संभव, बड़े सुरक्षा कार्यों के लिए अलग फंड की जरूरत


नई ग्रामीण रोजगार योजना में मजदूरी दर का मुद्दा भी सदन में उठा


शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में भूस्खलन प्रभावित गांवों को सुरक्षित करने के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध करवाने का मामला उठा। विधायक महेश्वर सिंह गौड़ ने सोलंग, खशेरी, दराल और सारी समेत विभिन्न गांवों में भूस्खलन से पैदा हुए खतरे का मुद्दा उठाते हुए सरकार से लैंडस्लाइड मिटिगेशन और मृदा संरक्षण के तहत जरूरी सुरक्षा कार्य करवाने की मांग की।


विधायक ने कृषि मंत्री से पूछा कि पिछले वर्ष चार स्थानों पर करीब 14 लाख रुपये के कार्य करवाए गए, जबकि 11 कार्य अभी लंबित हैं। उन्होंने कहा कि भूस्खलन के कारण कई गांवों पर खतरा बना हुआ है। ऐसे में दो, तीन या चार लाख रुपये की छोटी राशि से बड़े स्तर पर सुरक्षा कार्य करवाना संभव नहीं है। उन्होंने इन गांवों में लैंडस्लाइड मिटिगेशन या मृदा संरक्षण के तहत आवश्यक कार्य करवाने की मांग की।


बड़े सुरक्षा कार्यों के लिए अलग फंड जरूरी


कृषि मंत्री ने जवाब में कहा कि मृदा संरक्षण योजना के तहत छोटे और मध्यम वर्ग के किसानों के लिए छोटे स्तर के कार्य करवाए जाते हैं। इनमें सुरक्षा दीवारों समेत अन्य संरक्षण कार्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पीडीएनओ के तहत भी छोटे कार्यों के लिए बजट उपलब्ध होता है और कार्य पूरा होने के बाद नियमानुसार रीइंबर्समेंट किया जाता है।


मंत्री ने स्पष्ट किया कि बड़े स्तर की सुरक्षा दीवारों और अन्य बड़े संरक्षण कार्यों के लिए विभाग के पास पर्याप्त बजट नहीं होता। ऐसे कार्यों के लिए अलग व्यवस्था की जरूरत है। उन्होंने बताया कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए मिलने वाली राशि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार खर्च की जाती है।


नई ग्रामीण रोजगार योजना में मजदूरी दर पर सवाल


विधायक ने नई ग्रामीण रोजगार योजना में मजदूरी दर को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि एक मेसन की दिहाड़ी करीब 700 रुपये से कम नहीं है। ऐसे में यदि योजना के तहत ग्रामीणों को स्वयं काम करना पड़े और मजदूरी दर कम हो तो प्रभावी ढंग से काम करवाना मुश्किल होगा। उन्होंने सरकार से इस दिशा में भी विचार करने का आग्रह किया।


कृषि मंत्री ने कहा कि नई योजना की नीति केंद्र सरकार की ओर से तय की गई है और इसमें कई शर्तें लागू हैं। उन्होंने कहा कि योजना से जुड़े इस मामले को भारत सरकार के समक्ष उठाया जाएगा।