जल शक्ति विभाग में 4300 पद, सीबीएसई स्कूलों में 4800 शिक्षक और गैर-शिक्षक पद सृजित होंगे; मार्च 2027 तक भर्ती पूरी करने का लक्ष्य
शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए प्रदेश मंत्रिमंडल ने रोजगार के नए अवसर खोलने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने विभिन्न विभागों में 14 हजार से अधिक पदों के सृजन और भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी है। इनमें जल शक्ति, शिक्षा, स्वास्थ्य, वन और तकनीकी शिक्षा विभाग प्रमुख हैं।
सरकार ने मार्च 2027 तक इन पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। कैबिनेट के फैसलों से प्रदेश में रोजगार सृजन को गति मिलने की उम्मीद है, हालांकि युवाओं को अब भर्ती विज्ञापनों, चयन प्रक्रिया और नियुक्ति आदेश जारी होने का इंतजार रहेगा।
कैबिनेट बैठक में करीब 200 एजेंडा मदों पर चर्चा के बाद कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक के बाद मंत्री हर्षवर्धन चौहान और जगत सिंह नेगी ने फैसलों की जानकारी दी। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान के अनुसार, प्रदेश में अब तक करीब 32 हजार लोगों को रोजगार दिया जा चुका है, जबकि 18 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। सरकार का लक्ष्य इस वर्ष के अंत तक रोजगार पाने वालों की संख्या 50 हजार तक पहुंचाना है। इसके अतिरिक्त, मार्च 2027 तक 14 से 15 हजार पदों को भरने की योजना है।
जल शक्ति विभाग में 4300 पद, शिक्षा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भर्ती
कैबिनेट ने जल शक्ति विभाग में विभिन्न श्रेणियों के 4300 पद सृजित करने को मंजूरी दी है। इनमें पंप ऑपरेटर, फिटर, बेलदार, कुक और पैरा फिटर सहित अन्य पद शामिल हैं। इन पदों के सृजन से विभाग में कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ाने और पेयजल योजनाओं के संचालन को मजबूती देने में मदद मिलने की उम्मीद है।
शिक्षा क्षेत्र में भी बड़े स्तर पर पद सृजित करने का फैसला लिया गया है। सीबीएसई व्यवस्था के तहत 3900 शिक्षक और 900 गैर-शिक्षक पद सृजित किए जाएंगे। इसके अलावा प्रदेश के कॉलेजों में 320 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों को मंजूरी दी गई है। इन फैसलों को सरकारी शिक्षण संस्थानों में मानव संसाधन की जरूरतें पूरी करने और शैक्षणिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्वास्थ्य, वन और तकनीकी शिक्षा विभाग को भी राहत
स्वास्थ्य विभाग में 500 नर्सों की भर्ती का रास्ता साफ किया गया है। वहीं, वन विभाग में 500 वन रक्षक पद सृजित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त वन खंड अधिकारी के 57 पदों को भी मंजूरी दी गई है। तकनीकी शिक्षा क्षेत्र में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में इंस्ट्रक्टर सहित 200 पद सृजित किए जाएंगे।
कैबिनेट ने स्टेट फिंगरप्रिंट ब्यूरो और लॉटरी विभाग में भी पद सृजित करने का निर्णय लिया है। लोक निर्माण विभाग में दिव्यांग श्रेणी के बैकलॉग पदों को भरने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर भी सहमति बनी है। इन फैसलों से विभिन्न विभागों में रिक्तियों को भरने और सरकारी सेवाओं की कार्यक्षमता बढ़ाने की उम्मीद है।
एक लाख रोजगार के वादे पर सरकार की नजर
कांग्रेस ने प्रदेश में सरकारी क्षेत्र में एक लाख रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने का वादा किया है। कैबिनेट के ताजा फैसलों को सरकार की इसी प्रतिबद्धता से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, पद सृजित होने और अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिलने के बीच भर्ती नियमों, विज्ञापन जारी करने, आवेदन प्रक्रिया, परीक्षा या चयन तथा दस्तावेज सत्यापन जैसी औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं।
ऐसे में रोजगार की आस लगाए बैठे युवाओं के लिए वास्तविक राहत तभी सुनिश्चित होगी, जब निर्धारित समयसीमा के भीतर भर्ती प्रक्रिया पूरी कर नियुक्ति आदेश जारी किए जाएंगे।
कबड्डी में गोल्ड पर हर खिलाड़ी को एक करोड़
खेल नीति में बदलाव को मंजूरी, खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने के निर्देश
हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल ने खेल नीति में बदलाव को मंजूरी देते हुए कबड्डी में स्वर्ण पदक जीतने वाली प्रत्येक महिला खिलाड़ी को एक-एक करोड़ रुपये देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने ऐसे खिलाड़ियों को असिस्टेंट स्पोर्ट्स ऑफिसर के पदों पर नौकरी देने के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
सरकार के इन फैसलों का उद्देश्य प्रदेश के खिलाड़ियों को आर्थिक सुरक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के साथ उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करना है।
प्रदेश की पहली पोषण नीति को मंजूरी
विधानसभा में रखी जाएगी नीति, अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी
प्रदेश मंत्रिमंडल ने हिमाचल की पहली न्यूट्रिशन पॉलिसी को भी मंजूरी दी है। अब इसे विधानसभा में प्रस्तुत कर अंतिम मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। पोषण नीति को लेकर सरकार का उद्देश्य पोषण संबंधी प्राथमिकताओं को नीतिगत रूप देना और इस क्षेत्र में समन्वित प्रयासों को बढ़ावा देना है। नीति के अंतिम स्वरूप और इसके क्रियान्वयन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर आगे की प्रक्रिया में स्थिति स्पष्ट होगी।












