कांस्टेबल ने लगाए 1.87 लाख रुपये के भुगतान में धोखाधड़ी के आरोप, पुलिस फंड से 2.35 लाख रुपये की अवैध निकासी की भी जांच
शिमला। शिमला के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार गांधी के खिलाफ कथित धोखाधड़ी, सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में पुलिस थाना सदर में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस लाइन कैथू में तैनात एक कांस्टेबल की शिकायत के आधार पर 22 अक्तूबर 2026 को अभियोग संख्या 138/2026 दर्ज किया गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता कांस्टेबल ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2024 और 2025 के दौरान उसे सरकारी कार्यों और व्यवस्थाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके लिए उसे अपनी जेब से खर्च करने और बाद में भुगतान किए जाने का आश्वासन दिया गया था। कांस्टेबल के मुताबिक, उसने विभिन्न व्यवस्थाओं पर कुल 1,87,890 रुपये खर्च किए। इसके बाद संबंधित बिल कार्यालय में जमा करवाए गए, जिन्हें जांच के बाद भुगतान के लिए स्वीकृति भी मिल गई थी।
वाउचर पर हस्ताक्षर करवाने का आरोप
शिकायत के अनुसार, 6 फरवरी 2026 को तत्कालीन एसएसपी संजीव कुमार गांधी ने कांस्टेबल को अपने पास बुलाया और भुगतान से संबंधित वाउचर पर हस्ताक्षर करवाए। आरोप है कि उसे बताया गया कि भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के लिए हस्ताक्षर जरूरी हैं और स्वीकृत राशि उसे मिल जाएगी। हालांकि, हस्ताक्षर करने के बावजूद उसे भुगतान नहीं किया गया।
शिकायतकर्ता ने जुलाई 2026 में इस संबंध में शिकायत की। इसके बाद अकाउंट ब्रांच से जानकारी लेने पर उसे पता चला कि संबंधित राशि फंड से निकाली जा चुकी थी, लेकिन उसके खाते में जमा नहीं हुई। इससे उसे स्वीकृत भुगतान नहीं मिल पाया और अपनी देनदारियां चुकाने के लिए निजी संसाधनों से धन की व्यवस्था करनी पड़ी।
पुलिस फंड से 2.35 लाख रुपये की निकासी की जांच
शिकायत मिलने के बाद संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की गई। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, जिला पुलिस के एक फंड से करीब दो वर्षों के दौरान कुल 2,35,000 रुपये की कथित अवैध निकासी हुई थी। आरोप है कि इस राशि को किन उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया, इसका विवरण उपलब्ध नहीं है। इससे फंड में धन की कमी होने की बात सामने आई।
रिकॉर्ड के अनुसार, संजीव कुमार गांधी का एसएसपी शिमला के पद से कार्मिक विभाग में स्थानांतरण होने के दौरान फंड में हुई कमी को पूरा करने के लिए कांस्टेबल के बिलों की स्वीकृत राशि संबंधित फंड के खाते में स्थानांतरित कर दी गई। आरोप है कि यह राशि कांस्टेबल को भुगतान करने के बजाय फंड में जमा की गई, जिसके कारण उसे अपनी स्वीकृत रकम नहीं मिल पाई। पुलिस के अनुसार, फंड से निकाली गई राशि के खर्च से संबंधित रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं है।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
प्रथम दृष्टया वित्तीय रिकॉर्ड की जांच में धोखाधड़ी, सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और भुगतान संबंधी अनियमितताओं के तथ्य सामने आने के बाद पुलिस थाना सदर शिमला में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316(5), 314, 318, 336 और 340 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस मामले के वित्तीय रिकॉर्ड, भुगतान वाउचर और संबंधित लेनदेन की जांच कर रही है।












