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स्पीति में प्रदेश के पहले बैटरी स्टोरेज वाले सौर ऊर्जा संयंत्र का लोकार्पण

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सीएम सुक्खू ने लाहौल-स्पीति में 116.28 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के किए उद्घाटन और शिलान्यास, सीमावर्ती क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति होगी मजबूत


काजा। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने बुधवार को लाहौल-स्पीति जिले में 116.28 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास किए। इस दौरान उन्होंने स्पीति घाटी के रोंगटोंग में प्रदेश के पहले बैटरी स्टोरेज आधारित सौर ऊर्जा संयंत्र का लोकार्पण किया। इसके साथ ही पिन घाटी और स्पीति में सड़क संपर्क को मजबूत करने वाली दो महत्वपूर्ण परियोजनाएं भी जनता को समर्पित कीं। मुख्यमंत्री ने काजा और किन्नौर के समदो में विद्युत उप-केंद्रों की आधारशिला भी रखी।


रोंगटोंग में 4.42 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित दो मेगावाट क्षमता वाले सौर ऊर्जा संयंत्र के साथ एक मेगावाट-आवर की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित की गई है। समुद्र तल से करीब 3,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस संयंत्र से प्रतिवर्ष लगभग 36 लाख यूनिट बिजली उत्पादन होने की संभावना है। सितंबर 2026 तक इस परियोजना से कुल 22,58,752 यूनिट बिजली का उत्पादन हो चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 में स्पीति के पहले दौरे के दौरान स्थानीय लोगों ने बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को लेकर समस्याएं उठाई थीं। सौर ऊर्जा संयंत्र का संचालन शुरू होने से इन समस्याओं के समाधान में मदद मिलेगी। उन्होंने रोंगटोंग जलविद्युत परियोजना को पूरी तरह कार्यशील बनाने के लिए छह करोड़ रुपये खर्च करने की बात भी कही।


सीमावर्ती क्षेत्रों में मजबूत होगा बिजली नेटवर्क


मुख्यमंत्री ने काजा और किन्नौर जिले के समदो में 47.95 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 66/22 केवी विद्युत उप-केंद्रों की आधारशिला रखी। इन उप-केंद्रों से काजा, समदो और आसपास के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर और विश्वसनीय बनाने में मदद मिलेगी। वर्तमान में स्पीति को किन्नौर के पूह स्थित उप-केंद्र से करीब 200 किलोमीटर लंबे 22 केवी फीडर के माध्यम से बिजली मिलती है। फीडर की लंबाई अधिक होने के कारण वोल्टेज में उतार-चढ़ाव और तकनीकी बिजली हानि जैसी समस्याएं सामने आती हैं।


नए उप-केंद्रों से विद्युत वितरण नेटवर्क मजबूत होगा, बिजली की तकनीकी हानि कम होगी और स्थानीय आबादी के साथ पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा रक्षा संबंधी प्रतिष्ठानों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। प्रतिकूल मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले इन सीमावर्ती क्षेत्रों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में इसे अहम कदम माना जा रहा है।


पिन घाटी और हिक्किम तक बेहतर होगा सड़क संपर्क


मुख्यमंत्री ने पिन घाटी में 39.55 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित चिदांग-तंगती खर तेलिंग सड़क परियोजना का लोकार्पण किया। इस परियोजना के तहत कच्ची सड़क को बेहतर और हर मौसम में उपयोग योग्य बनाया गया है। सड़क पर क्रैश बैरियर, पैरापेट, संकेतक और गति अवरोधक जैसी सुरक्षा सुविधाएं भी विकसित की गई हैं।


बेहतर सड़क संपर्क से स्थानीय लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी और हरी मटर, बीज आलू सहित कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाना आसान होगा। इससे पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षण संस्थानों और प्रशासनिक कार्यालयों तक पहुंच भी सुगम होगी।


मुख्यमंत्री ने स्पीति घाटी में 24.36 करोड़ रुपये की लागत से 12 किलोमीटर लंबे तांगयुत-हिक्किम सड़क मार्ग के उन्नयन कार्य का भी लोकार्पण किया। इससे प्रसिद्ध डाकघर वाले हिक्किम गांव तक पहुंच बेहतर होगी। सड़क सुविधा में सुधार से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने, स्थानीय उत्पादों के परिवहन में आसानी और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। इन परियोजनाओं से दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक विकास को गति मिलेगी।