सरकार ने दी मंजूरी, निदेशालय के सुचारू संचालन के लिए छह स्वीकृत पद स्थानांतरित
चार मल्टी टास्क वर्कर भी आउटसोर्स आधार पर होंगे तैनात
शिमला। हिमाचल प्रदेश में खनन क्षेत्र के प्रशासनिक कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने उद्योग विभाग के तहत अलग खनन निदेशालय (डायरेक्टरेट ऑफ माइंस) के गठन को मंजूरी दे दी है। राज्यपाल की ओर से 13 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, निदेशालय तत्काल प्रभाव से अस्तित्व में आएगा। इसका उद्देश्य खनन से जुड़े प्रशासनिक कार्यों की निगरानी और संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
अधिसूचना के अनुसार, नवगठित खनन निदेशालय का नेतृत्व निदेशक खनन करेंगे। निदेशक का पद ग्रुप-ए का होगा और इसे आईएएस कैडर से भरा जाएगा। निदेशक खनन विभागाध्यक्ष (एचओडी) के रूप में कार्य करेंगे और निदेशालय के कामकाज पर प्रशासनिक नियंत्रण, पर्यवेक्षण तथा निगरानी की जिम्मेदारी संभालेंगे। हालांकि, निदेशालय उद्योग विभाग के समग्र प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन रहेगा।
छह स्वीकृत पद किए स्थानांतरित
निदेशालय के सुचारू संचालन के लिए उद्योग विभाग के छह स्वीकृत पदों को तत्काल प्रभाव से खनन निदेशालय में स्थानांतरित किया गया है। इनमें संयुक्त निदेशक का एक पद, वित्त एवं लेखा सहायक नियंत्रक का एक पद, अधीक्षक ग्रेड-1 का एक पद, वरिष्ठ सहायक का एक पद, सूचना प्रौद्योगिकी श्रेणी के कनिष्ठ कार्यालय सहायक के तीन पद और चपरासी का एक पद शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, निदेशालय को आउटसोर्स आधार पर चार मल्टी टास्क वर्कर रखने की अनुमति भी दी गई है। इससे निदेशालय के दैनिक प्रशासनिक कार्यों के संचालन में सहायता मिलेगी।
नियमों में भी किए जाएंगे आवश्यक संशोधन
नवगठित निदेशालय को प्रभावी ढंग से संचालित करने और निदेशक खनन को आवश्यक शक्तियां एवं कार्य सौंपने के लिए संबंधित वैधानिक नियमों और अधिसूचनाओं में जरूरी संशोधन किए जाएंगे। यह कदम खनन प्रशासन की जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने और निदेशालय के कामकाज को सुचारू बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।












