Advertisement

कंपोजिट टेंडर से इलेक्ट्रिकल ठेकेदारों और स्थानीय कामगारों के हित प्रभावित नहीं होंगे: राजेश धर्माणी

Spread the love

बड़े निर्माण कार्यों में देरी और लागत बढ़ने से बचने के लिए अपनाई व्यवस्था, स्थानीय ठेकेदारों और कुशल कामगारों के हित सुरक्षित रखने का सरकार का आश्वासन


शिमला। हिमाचल प्रदेश में बड़े निर्माण कार्यों के लिए अपनाई जा रही कंपोजिट टेंडर व्यवस्था को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया है कि इससे इलेक्ट्रिकल ठेकेदारों और स्थानीय कुशल कामगारों के रोजगार पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी ने विधानसभा में कहा कि कंपोजिट टेंडर का उद्देश्य सिविल और इलेक्ट्रिकल कार्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर परियोजनाओं को समय पर पूरा करना है।


धर्माणी ने कहा कि कई बार सिविल और इलेक्ट्रिकल कार्य अलग-अलग ठेकेदारों को मिलने के कारण दोनों के बीच समन्वय की कमी रहती है, जिससे परियोजनाओं में देरी होती है। देरी के चलते लागत बढ़ने के साथ ठेकेदारों की ओर से विभिन्न प्रकार के क्लेम भी सामने आते हैं। इसी समस्या को दूर करने के लिए बड़े निर्माण कार्यों में कंपोजिट टेंडर की व्यवस्था अपनाई जा रही है।


उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपोजिट टेंडर का अर्थ यह नहीं है कि इलेक्ट्रिकल कार्य भी केवल सिविल ठेकेदार ही करेगा। निविदा शर्तों के अनुसार मुख्य ठेकेदार को विद्युत कार्य के लिए सक्षम एजेंसी को अपने साथ जोड़ना होगा। बोलीदाता को निर्धारित प्रक्रिया के तहत कम से कम तीन विद्युत एजेंसियों के नाम प्रस्तुत करने होंगे, ताकि कार्य अधिकृत और सक्षम एजेंसियों के माध्यम से ही कराया जा सके।


सरकार ने सदन में बताया कि प्रदेश में करीब 600 इलेक्ट्रिकल ठेकेदार पीडब्ल्यूडी के इलेक्ट्रिकल विंग से जुड़े हैं। सरकार का कहना है कि कंपोजिट व्यवस्था से इन ठेकेदारों के काम के अवसर समाप्त नहीं होंगे, बल्कि बड़े प्रोजेक्ट में उन्हें संबंधित विद्युत कार्यों में शामिल किया जाएगा।।


सदन में सदस्यों ने हालांकि छोटे स्थानीय ठेकेदारों और हिमाचली कुशल कामगारों के हितों को लेकर चिंता जताई। सदस्यों ने कहा कि प्रदेश में लंबे समय से करीब 600-700 लोग इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं, जबकि इलेक्ट्रिकल और लेबर से जुड़े लोगों की संख्या हजारों में है। ऐसे में बड़े ठेकेदारों के आने से स्थानीय लोगों के रोजगार पर असर नहीं पड़ना चाहिए।


इस पर सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि स्थानीय छोटे ठेकेदारों और कुशल कामगारों के हित सुरक्षित रखे जाएंगे। बड़े ठेकेदारों के साथ काम करने वाले स्थानीय ठेकेदारों और श्रमिकों के भुगतान में अनावश्यक देरी न हो, इसके लिए भी आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।


धर्माणी ने यह भी कहा कि बड़े निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्धता दोनों महत्वपूर्ण हैं। यदि काम में देरी होती है तो परियोजना की लागत बढ़ती है और सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता है। इसलिए कंपोजिट टेंडर के जरिए सिविल और इलेक्ट्रिकल कार्यों का बेहतर समन्वय कर परियोजनाओं को समय पर पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।


उन्होंने कहा कि कंपोजिट टेंडर व्यवस्था का उद्देश्य स्थानीय ठेकेदारों और कामगारों के अवसर कम करना नहीं, बल्कि निर्माण कार्यों में देरी रोकना और उनकी गुणवत्ता व समयबद्धता सुनिश्चित करना है।