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सीपीआई(एम) ने सरकार की नीतियों के खिलाफ संघर्ष तेज करने का किया आह्वान

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राज्य सचिव संजय चौहान बोले-महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट से जनता परेशान, शिक्षा-बिजली के निजीकरण का भी किया विरोध

शिमला। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी की बैठक 17-18 अगस्त को पार्टी कार्यालय शिमला में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता राज्य कमेटी के सदस्य कॉमरेड ओंकार शाद ने की। बैठक में पोलितब्यूरो सदस्य कॉमरेड तपन सेन ने विशेष रूप से भाग लिया। राज्य सचिव कॉमरेड संजय चौहान ने राज्य की राजनीतिक एवं संगठनात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत की।

बैठक में कॉमरेड तपन सेन ने केंद्रीय कमेटी की बैठक की रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि मोदी सरकार की नवउदारवादी नीतियों के कारण देश में मजदूरों, किसानों और आम जनता पर बेरोजगारी व महंगाई का बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बड़े कॉर्पोरेट घरानों को देश के संसाधनों के दोहन की खुली छूट दे रही है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील और अन्य देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) को लेकर भी उन्होंने केंद्र सरकार पर देश के हितों से समझौता करने का आरोप लगाया। पार्टी ने मेहनतकश जनता से इन नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष तेज करने का आह्वान किया।

बैठक में हाल ही में पांच राज्यों में हुए चुनावों की समीक्षा रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के विभिन्न राजनीतिक एवं जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

प्रदेश के आर्थिक संकट पर जताई चिंता

राज्य कमेटी ने हिमाचल प्रदेश में बढ़ते आर्थिक संकट पर गंभीर चिंता जताई। राज्य सचिव संजय चौहान ने कहा कि प्रदेश पर कर्ज लगातार बढ़ रहा है और केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली ग्रांट व सहायता में कटौती की जा रही है। आर्थिक संकट के चलते सरकार सार्वजनिक सेवाओं से पीछे हट रही है और दूसरी ओर जनता पर करों व सेस का बोझ बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, पेयजल और बिजली जैसी मूलभूत सेवाओं पर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों में एक लाख से अधिक पद खाली हैं, जबकि नई भर्तियां नियमित आधार पर करने के बजाय ठेका, आउटसोर्स, पार्ट टाइम, कैजुअल, स्कीम वर्कर, मल्टी टास्क वर्कर, मित्र और जॉब ट्रेनी जैसे माध्यमों से की जा रही हैं। पार्टी ने सभी रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करने तथा करों, सेस और विश्वविद्यालयों में बढ़ाई गई फीस व अन्य शुल्क वापस लेने की मांग की।

NEP और सरकारी स्कूलों के मुद्दे पर सरकार को घेरा

संजय चौहान ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार केंद्र के दबाव में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) लागू कर शिक्षा के निजीकरण, व्यवसायीकरण और भगवाकरण को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि युक्तिकरण के नाम पर सरकारी स्कूलों को बंद और मर्ज किया जा रहा है, जिससे बच्चों को महंगे निजी स्कूलों में पढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

उन्होंने सरकारी स्कूलों को CBSE के हवाले करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और कहा कि आधारभूत ढांचे तथा शिक्षकों की कमी के कारण सरकारी स्कूलों से बच्चों का पलायन बढ़ रहा है। पार्टी ने NEP को रद्द करने तथा सरकारी स्कूलों को बंद या मर्ज करने के फैसले को वापस लेने की मांग की।

बिजली क्षेत्र के निजीकरण का विरोध

सीपीआई(एम) ने बिजली क्षेत्र के निजीकरण की नीति का भी विरोध किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि केंद्र के दबाव में प्रदेश बिजली बोर्ड को निजी हाथों में सौंपने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। इसके तहत प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने और बिजली सब स्टेशनों को निजी हाथों में देने की प्रक्रिया पर भी पार्टी ने आपत्ति जताई। पार्टी ने बिजली दरों में बढ़ोतरी को वापस लेने की मांग की।

किसानों और वन अधिकारों को लेकर उठाई आवाज

पार्टी ने गरीब परिवारों और किसानों को कम से कम पांच बीघा जमीन उपलब्ध करवाने तथा कब्जों के नियमितीकरण के लिए सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप शीघ्र नीति बनाने की मांग की। साथ ही वन अधिकार कानून, 2006 (FRA) के तहत आदिवासी और पारंपरिक वनवासियों के अधिकारों की रक्षा करने की मांग की गई।

पार्टी ने वन विभाग द्वारा किसानों की कब्जे वाली जमीन पर पैदा की गई फसलों की नीलामी का विरोध करते हुए इसे तत्काल रोकने की मांग की।

MIS को मजबूत करने और सेब उत्पादकों को राहत की मांग

सीपीआई(एम) ने किसानों के लिए चलाई जा रही मंडी मध्यस्थता योजना (MIS) को कमजोर करने के फैसले का विरोध किया। पार्टी ने केंद्र द्वारा वर्ष 2023 में MIS के बजट को समाप्त करने के निर्णय को वापस लेने की मांग की। राज्य सरकार से भी योजना को बिना शर्त पहले की तरह संचालित करने की मांग की गई।

पार्टी ने सेब और अन्य फलों के लिए समर्थन मूल्य घोषित करने, संग्रहण के लिए डिपो खोलने तथा सभी किसानों का MIS का लंबित भुगतान तत्काल जारी करने की मांग की।

आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की मांग

राज्य कमेटी ने वर्ष 2023 और 2025 की भारी बारिश से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और उचित राहत में तेजी लाने की मांग की। संजय चौहान ने कहा कि आज भी कई प्रभावित परिवार सरकारी राहत से वंचित हैं। उन्होंने इस वर्ष बारिश से प्रभावित परिवारों को भी तत्काल राहत उपलब्ध करवाने की मांग की।

रेहड़ी-फड़ी वालों के आंदोलन का समर्थन

पार्टी ने प्रदेश के नगर निगमों, नगर निकायों और प्रशासन द्वारा रेहड़ी-फड़ी व तहबाजारी का काम करने वालों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई का विरोध किया। संजय चौहान ने कहा कि स्ट्रीट वेंडर्स (जीविका संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014 के तहत रेहड़ी-फड़ी वालों के अधिकारों की रक्षा की गई है।

उन्होंने शिमला शहर में रेहड़ी-फड़ी और तहबाजारी करने वालों को पहले की तरह बसाने की मांग की, ताकि वे शांतिपूर्वक अपनी आजीविका चला सकें। पार्टी ने तहबाजारी यूनियन द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की।

अंत में राज्य सचिव संजय चौहान ने प्रदेश की जनता से केंद्र और राज्य सरकार की कथित जनविरोधी नवउदारवादी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष तेज करने का आह्वान किया।