नाचन विधायक विनोद कुमार ने विधानसभा में उठाए स्वास्थ्य व्यवस्था के मुद्दे
फेल दवा सैंपलों पर कार्रवाई, मुफ्त दवाइयों की उपलब्धता और हिमकेयर के तहत इलाज जारी रखने की मांगी गारंटी
शिमला। नाचन विधायक विनोद कुमार ने विधानसभा में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की बात कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर मरीजों को दवाइयों, एंबुलेंस और डॉक्टरों की कमी से जूझना पड़ रहा है। उन्होंने 15वें वित्त आयोग के तहत प्रदेश को मिली केंद्रीय राशि, फेल दवा सैंपलों पर कार्रवाई, आधारभूत स्वास्थ्य संस्थानों में सुविधाओं और हिमकेयर योजना के तहत मरीजों के उपचार को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
नियम-130 के तहत स्वास्थ्य सेवाओं पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए विनोद कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग सीधे हर परिवार और हर व्यक्ति से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार व्यवस्था परिवर्तन और स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े बदलाव के दावे कर रही है, लेकिन वास्तविक स्थिति का आकलन जमीनी स्तर पर उपलब्ध सुविधाओं से होना चाहिए।
15वें वित्त आयोग की 521 करोड़ की राशि का उठाया मुद्दा
विनोद कुमार ने कहा कि सरकार लगातार केंद्र से सहयोग नहीं मिलने की बात करती है, जबकि 15वें वित्त आयोग के तहत प्रदेश को 521 करोड़ रुपये उपलब्ध करवाए गए हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि इस राशि में से स्वास्थ्य क्षेत्र और अन्य संबंधित कार्यों के लिए कितना पैसा आवंटित किया गया है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र में कई नियुक्तियां और सुविधाएं संचालित हो रही हैं। उन्होंने कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) की नियुक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में तैनात CHO राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत केंद्र सरकार की व्यवस्था से जुड़े हैं और उनके वेतन का भुगतान भी केंद्र की ओर से किया जाता है।
फेल दवा सैंपलों पर कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं?
विधायक ने प्रदेश में दवाइयों के सैंपल फेल होने के मामलों को लेकर सरकार से सीधा सवाल किया। उन्होंने कहा कि समय-समय पर अलग-अलग स्थानों पर छापे और दवाइयों के सैंपल फेल होने की जानकारी सामने आती है, लेकिन यह स्पष्ट होना चाहिए कि जिन कंपनियों की दवाइयों के सैंपल फेल हुए, उनके खिलाफ सरकार ने क्या कार्रवाई की।
उन्होंने सरकार से फेल सैंपलों की संख्या, संबंधित कंपनियों और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की।
आधार स्वास्थ्य संस्थानों में अल्ट्रासाउंड-CT स्कैन सुविधाओं पर सवाल
विनोद कुमार ने सरकार की ओर से आधार स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाने के दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि कितने आधार स्वास्थ्य संस्थानों में अल्ट्रासाउंड, CT स्कैन और MRI जैसी सुविधाएं वास्तव में शुरू हो चुकी हैं।
उन्होंने नाचन विधानसभा क्षेत्र के सिविल अस्पताल का उदाहरण देते हुए कहा कि अस्पताल का भवन तो तैयार है, लेकिन वहां अपेक्षित स्वास्थ्य सुविधाएं अभी तक पूरी तरह शुरू नहीं हुई हैं।
एंबुलेंस में टायर और तेल तक नहीं : विनोद
विधायक ने एंबुलेंस व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दुर्घटना या गंभीर बीमारी की स्थिति में लोग विधायक, पंचायत प्रतिनिधियों और अन्य जनप्रतिनिधियों को फोन करते हैं। कई बार ऐसी स्थिति सामने आती है कि एंबुलेंस का टायर खराब है या उसमें ईंधन तक उपलब्ध नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पुरानी और खराब एंबुलेंस को तत्काल हटाकर नई एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाएं तथा सभी एंबुलेंस में ईंधन और आवश्यक रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
मुफ्त दवाइयों की उपलब्धता पर भी सवाल
विनोद कुमार ने कहा कि सरकारी सिविल अस्पतालों और सीएचसी में 482 प्रकार की दवाइयां निशुल्क उपलब्ध करवाने का प्रावधान है। उन्होंने दावा किया कि जमीनी स्तर पर कई अस्पतालों में इन दवाइयों की उपलब्धता बेहद कम है।
इसी तरह उन्होंने पीएचसी में निर्धारित 67 प्रकार की मुफ्त दवाइयों और स्वास्थ्य उपकेंद्रों में 91 प्रकार की दवाइयों की उपलब्धता का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि सूची में शामिल दवाइयां वास्तव में मरीजों को उपलब्ध हों।
हिमकेयर योजना बंद न करने की मांग
विधायक ने हिमकेयर योजना को लेकर कहा कि पूर्व में गरीब और पात्र लोगों को सरकारी अस्पतालों के साथ निजी अस्पतालों में भी उपचार की सुविधा मिलती थी। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में अधिक भीड़ होने और आपात स्थिति में मरीज निजी अस्पतालों में इलाज करवाते थे।
उन्होंने सरकार से कहा कि यदि हिमकेयर में भ्रष्टाचार या अनियमितता हुई है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, लेकिन योजना को बंद नहीं किया जाना चाहिए। गरीब और पात्र लोगों को इसका लाभ लगातार मिलना चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से सदन में स्पष्ट आश्वासन देने की मांग की कि हिमकेयर के पात्र लाभार्थियों का उपचार योजना के तहत निशुल्क जारी रहेगा।
सहारा योजना के 35 हजार लाभार्थियों का उठाया मुद्दा
विनोद कुमार ने सहारा योजना को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के समय करीब 35 हजार लोगों को योजना का लाभ मिल रहा था, लेकिन अब पात्र लोग भी लाभ से वंचित होने की शिकायत कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में जीवित लोगों को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया, जिससे वे योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। उन्होंने सरकार से सभी पात्र लोगों का सत्यापन कर उन्हें सहारा योजना का लाभ देने की मांग की।
कनाड पीएचसी में डॉक्टर की डेपुटेशन खत्म करने की मांग
नाचन विधायक ने अपने विधानसभा क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पीएचसी कनाड में डॉक्टर तैनात है, लेकिन छह दिनों में केवल दो-तीन दिन ही वहां सेवाएं देता है। बाकी दिनों में उसे डेपुटेशन पर भेज दिया जाता है।
उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से सीएमओ को निर्देश देकर डॉक्टर को कनाड पीएचसी में ही नियमित रूप से तैनात करने की मांग की, ताकि स्थानीय लोगों को लगातार स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
32 पंचायतों और 80 हजार से अधिक आबादी वाले दलोटू क्षेत्र को सीएचसी की जरूरत
विधायक ने कहा कि दलोटू विकासखंड में 32 पंचायतें और 80 हजार से अधिक आबादी है। उन्होंने बताया कि पूर्व सरकार के समय क्षेत्र के एक पीएचसी को सीएचसी में अपग्रेड किया गया था। उन्होंने सरकार से इसे दोबारा सीएचसी के रूप में बहाल करने की मांग की, ताकि इतनी बड़ी आबादी को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें
गोहर अस्पताल और कोरोना काल की स्वास्थ्य व्यवस्था का जिक्
विनोद कुमार ने सिविल अस्पताल गोहर का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कोरोना काल में हिमाचल की स्वास्थ्य व्यवस्था और निशुल्क उपचार का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज सरकार की ओर से निशुल्क किया गया था।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में आम लोगों के सामने इलाज का खर्च उठाना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। उन्होंने सरकार से गरीब मरीजों को आर्थिक बोझ से बचाने के लिए सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग की।
इलाज के लिए मंगलसूत्र तक बेचने की नौबत : विनोद कुमार
विधायक ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि आज प्रदेश में ऐसी स्थिति पैदा हो गई है कि इलाज का खर्च उठाने के लिए महिलाओं को अपना मंगलसूत्र तक बेचना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं का वास्तविक आकलन आधुनिक मशीनों की घोषणा से नहीं, बल्कि इस बात से होना चाहिए कि आम मरीज को अस्पताल में डॉक्टर, दवा, जांच और समय पर एंबुलेंस मिल रही है या नहीं।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि रोबोटिक सर्जरी जैसी आधुनिक तकनीक के साथ-साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और सिविल अस्पतालों की बुनियादी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया जाए।
विनोद कुमार ने कहा कि सरकार को स्वास्थ्य क्षेत्र में किए जा रहे दावों के साथ उनकी जमीनी स्थिति की भी समीक्षा करनी चाहिए, ताकि प्रदेश के ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के लोगों को वास्तव में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।











