नियम-130 के तहत चर्चा में उठा स्वास्थ्य सेवाओं का मुद्दा, दवाओं, उपकरणों और रिक्त पदों को लेकर सरकार से मांगा जवाब
शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सोमवार को नियम-130 के तहत स्वास्थ्य विभाग की स्थिति पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं विधायक विपिन सिंह परमार ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि पिछले करीब पौने चार वर्षों में सरकार ने स्वास्थ्य संस्थानों को मजबूत करने के बजाय उन्हें बदहाली की ओर धकेल दिया है। परमार ने स्वास्थ्य विभाग में हुई खरीद को लेकर सरकार से श्वेत पत्र जारी करने और टांडा मेडिकल कॉलेज में स्टेंट खरीद में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की।
स्वास्थ्य संस्थानों को बरबादी की ओर धकेलने का आरोप
परमार ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार सत्ता में आने के पहले दिन से ही स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर गंभीर नहीं रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने तीन बजटों में स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर बड़े-बड़े दावे और घोषणाएं कीं, लेकिन इनमें से अधिकांश का अपेक्षित असर धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है। आदर्श स्वास्थ्य संस्थान बनाने की घोषणाएं कागजों तक सीमित होकर रह गई हैं और कई योजनाएं अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, दवाएं और आधुनिक उपकरण उपलब्ध होना जरूरी है, लेकिन मौजूदा स्थिति इसके विपरीत है।
स्वास्थ्य विभाग की खरीद पर श्वेत पत्र जारी करे सरकार
विपिन परमार ने स्वास्थ्य विभाग में उपकरणों, दवाओं और अन्य सामग्री की खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सरकार से पूरे मामले पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में पिछले वर्षों के दौरान हुई खरीद का पूरा विवरण सार्वजनिक होना चाहिए और यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि किन उपकरणों और दवाओं की खरीद किस प्रक्रिया के तहत की गई।
उन्होंने टांडा मेडिकल कॉलेज में स्टेंट खरीद में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग भी उठाई। परमार ने कहा कि चिकित्सा उपकरणों और सामग्री की खरीद में किसी भी तरह की अनियमितता को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा संबंध मरीजों की जिंदगी और सरकारी धन से है।
हिमकेयर योजना की 380 करोड़ से अधिक देनदारियों का मुद्दा
भाजपा विधायक ने हिमकेयर योजना को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार हिमकेयर योजना को बदनाम करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार के पास योजना को चलाने के लिए पर्याप्त धन नहीं है तो इसे बंद कर देना चाहिए, लेकिन यदि इसे जारी रखा जा रहा है तो इसका संचालन सही तरीके से होना चाहिए।
परमार ने दावा किया कि सरकार पर हिमकेयर योजना की ही 380 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारियां हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य जैसी महत्वपूर्ण योजना के तहत भुगतान लंबित रहना गंभीर विषय है और इसका असर योजना से जुड़े अस्पतालों तथा मरीजों पर पड़ रहा है।
पुरानी तकनीक की एमआरआई मशीनों की खरीद पर सवाल
परमार ने चिकित्सा उपकरणों की खरीद को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में करोड़ों रुपये खर्च कर पुरानी तकनीक वाली एमआरआई मशीनें खरीदी जा रही हैं। उनका दावा था कि जिस कीमत पर पुरानी तकनीक की मशीनें खरीदी जा रही हैं, उसी कीमत में आधुनिक तकनीक से लैस मशीनें उपलब्ध हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार को चिकित्सा उपकरणों की खरीद में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए। अस्पतालों में ऐसी तकनीक उपलब्ध करवाई जानी चाहिए, जिससे मरीजों को बेहतर जांच और उपचार की सुविधा मिल सके।
सरकार के पास स्वास्थ्य क्षेत्र में बताने के लिए उपलब्धि नहीं : परमार
विपिन परमार ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी उपलब्धियां गिनाने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों में सरकार की नीति और कार्यप्रणाली स्पष्ट नहीं है।
उन्होंने कहा कि अस्पतालों के निर्माणाधीन भवनों को समय पर पूरा करने, आधुनिक उपकरण उपलब्ध करवाने, दवाओं की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और रिक्त पदों को भरने की दिशा में सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।
निर्माणाधीन भवनों, उपकरणों और रिक्तियों पर भी चर्चा
नियम-130 के तहत हुई चर्चा में प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों के निर्माणाधीन भवनों, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों, दवाओं की उपलब्धता, रिक्त पदों और स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए।
विधायक विपिन सिंह परमार, नीरज नैय्यर, डॉ. जनक राज और पवन काजल ने स्वास्थ्य विभाग से संबंधित यह प्रस्ताव चर्चा के लिए सदन में रखा था। प्रस्ताव पर चर्चा में नीरज नैय्यर, डॉ. जनक राज, पवन काजल और रामकुमार ने भी हिस्सा लिया।
चर्चा के दौरान विपक्ष ने स्वास्थ्य विभाग की खरीद प्रक्रिया, हिमकेयर योजना की देनदारियों और अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं को लेकर सरकार से जवाब मांगा। साथ ही चिकित्सा संस्थानों में आधुनिक सुविधाएं बढ़ाने, पर्याप्त दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और खाली पदों को भरने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।











