शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मेधावी विद्यार्थियों के लिए बड़ा अवसर उपलब्ध कराया है। शिक्षा विभाग ने शिव नाडर फाउंडेशन के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत प्रदेश के 5वीं कक्षा के विद्यार्थियों का चयन कर उन्हें 6वीं से 12वीं तक आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा दी जाएगी।
योजना के तहत आवेदन की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है, जबकि चयन परीक्षा 20 सितंबर 2026 को आयोजित होगी। इस योजना का लाभ उन विद्यार्थियों को मिलेगा जिनके माता-पिता की वार्षिक आय 3 लाख रुपये से कम है। चयनित विद्यार्थियों की छठी से 12वीं तक की पढ़ाई, आवास, भोजन और अन्य सभी खर्च शिव नाडर फाउंडेशन वहन करेगा।
अधिक जानकारी के लिए अभिभावक व्हाट्सएप नंबर 8851011758 पर संपर्क कर सकते हैं। शिक्षा विभाग ने सभी उपनिदेशकों, स्कूल प्रमुखों और शिक्षकों को योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं।
बैठक में यह भी बताया गया कि भविष्य में प्रत्येक जिले में संयुक्त निदेशक (शिक्षा) का एक पद सृजित किया जाएगा। इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इस व्यवस्था के लागू होने से जिला स्तर पर कार्यरत उपनिदेशकों को पदोन्नति के अवसर मिलेंगे और विभागीय कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों की प्रतिबद्धता तथा सकारात्मक कार्यशैली के कारण शिक्षा विभाग ने पिछले वर्षों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि समग्र शिक्षा, असर, परख और शत-प्रतिशत साक्षरता जैसे क्षेत्रों में प्रदेश ने ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की है।
उन्होंने कहा कि सरकार समय की आवश्यकता के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था में सुधार और संस्थानों के सुदृढ़ीकरण के लिए लगातार कार्य कर रही है। इसी कड़ी में स्कूलों के साथ-साथ उच्च शिक्षा संस्थानों के समेकन की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। जिन महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या अत्यंत कम है, वहां संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए भविष्य में भी व्यावहारिक निर्णय लिए जाएंगे।
इसके अलावा शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि विभिन्न कारणों से विभागीय समीक्षा बैठक समय पर नहीं हो सकी थी, लेकिन समग्र शिक्षा की विस्तृत प्रस्तुति के माध्यम से पिछले चार वर्षों की उपलब्धियों का व्यापक आकलन किया गया। उन्होंने विश्वास जताया कि अधिकारियों और शिक्षकों के सुझावों से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा।











