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हिमाचल में आईएएस कैडर के 23 पद होंगे कम, 153 से घटकर 130 रहेंगे स्वीकृत पद

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मुख्यमंत्री सुक्खू बोले-,प्रदेश में 100 से 110 आईएएस अधिकारी ही पर्याप्त, प्रशासनिक खर्च घटाकर होगी करीब 200 करोड़ की बचत

शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार प्रशासनिक ढांचे को अधिक प्रभावी और खर्च को नियंत्रित करने के लिए आईएएस कैडर के स्वीकृत पदों में कटौती करने जा रही है। प्रदेश में आईएएस कैडर के 153 स्वीकृत पदों को घटाकर 130 किया जाएगा। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि उनकी व्यक्तिगत राय में हिमाचल जैसे छोटे राज्य के लिए 100 से 110 आईएएस अधिकारी ही पर्याप्त हैं।


सरकार का तर्क है कि प्रशासनिक ढांचे को आवश्यकता के अनुरूप छोटा करने से गैर-जरूरी खर्च में कमी आएगी। मुख्यमंत्री के अनुसार अधिकारियों के पदों और प्रशासनिक खर्च में कटौती से करीब 200 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। इस राशि को विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं पर खर्च किया जा सकेगा।


आईएफएस कैडर में भी 35 पद कम होंगे


सरकार ने आईएफएस कैडर के पुनर्गठन का भी फैसला किया है। प्रदेश में 118 स्वीकृत आईएफएस पदों को घटाकर 83 किया जाएगा। यानी आईएफएस कैडर में 35 पदों की कमी होगी। इसके अलावा आईपीएस कैडर की भी आवश्यकता के अनुसार समीक्षा कर पदों में कटौती किए जाने की बात कही गई है।


सरकारी वाहनों की संख्या 56 से घटकर 30 होगी


प्रशासनिक खर्च कम करने की कवायद का असर सरकारी वाहनों पर भी पड़ेगा। फील्ड अधिकारियों के लिए उपलब्ध सरकारी वाहनों की संख्या 56 से घटाकर 30 की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सरकारी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है।


एचआरटीसी में भी होगी अधिकारियों की संख्या कम


सरकार की खर्च घटाने की योजना केवल प्रशासनिक सेवाओं तक सीमित नहीं रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि एचआरटीसी में भी अधिकारियों की संख्या कम की जाएगी। विभिन्न विभागों, निगमों और संस्थानों में उपलब्ध मानव संसाधन की आवश्यकता के अनुसार समीक्षा की जा रही है। सरकार का फोकस ऐसे पदों और संसाधनों को कम करने पर है, जिनकी मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था में आवश्यकता नहीं रह गई है।


खर्च घटाकर विकास पर जोर


सरकार की इस पूरी कवायद को प्रशासनिक खर्च कम करने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने से जोड़कर देखा जा रहा है। आईएएस, आईएफएस और अन्य कैडर के पुनर्गठन के साथ सरकारी वाहनों और निगमों में अधिकारियों की संख्या घटाने से सरकार को उम्मीद है कि बचने वाले संसाधनों को विकास तथा जनहित की योजनाओं में लगाया जा सकेगा।