नर्सों की आउटसोर्स भर्ती बंद करने का ऐलान, 600 नर्सों की भर्ती प्रक्रिया जारी; बेरोजगारों से पैसे लेने की शिकायत पर सख्त कार्रवाई का भरोसा, कोविड कर्मियों को दोबारा अवसर देने की बात
शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, एजेंसियों के एम्पैनलमेंट, नौकरी की सुरक्षा और स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स व्यवस्था को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। करसोग के विधायक दीप राज की ओर से आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण, नौकरी की सुरक्षा, वेतन वृद्धि और विभिन्न विभागों में स्वीकृत पदों को भरने को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सरकार की भर्ती नीति को लेकर स्थिति स्पष्ट की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार भर्ती प्रक्रिया में मेरिट के साथ कोई समझौता नहीं करेगी। आउटसोर्स के माध्यम से होने वाली भर्तियों में भी राजनीतिक या व्यक्तिगत सिफारिश की कोई जगह नहीं होगी। लिखित परीक्षा में पात्रता पूरी करते हुए जो अभ्यर्थी मेरिट में आएगा, उसके दस्तावेजों की जांच के बाद उसे नियुक्ति दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने सदन में स्पष्ट किया कि मंत्री, मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री या किसी अन्य व्यक्ति की सिफारिश पर नौकरी नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार भर्ती व्यवस्था में बदलाव कर रही है और व्यक्तिगत सिफारिश की गुंजाइश खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है।
बेरोजगारों से पैसे लेने का आरोप, शिकायत मिली तो होगी सख्त कार्रवाई
बहस के दौरान विपक्ष ने आरोप लगाया कि कुछ आउटसोर्स एजेंसियां बेरोजगार युवाओं को नौकरी देने के नाम पर उनसे पैसे वसूल रही हैं। विपक्ष ने इसे गंभीर मामला बताते हुए ऐसी एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी आउटसोर्स कर्मचारी या बेरोजगार से नौकरी के नाम पर पैसे लिए जाने की शिकायत सरकार के संज्ञान में आती है तो इसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने ऐसे मामलों की जानकारी सरकार तक पहुंचाने को कहा।
आउटसोर्स एजेंसियों के एम्पैनलमेंट पर भी सवाल
विधानसभा में चर्चा केवल कर्मचारियों की भर्ती तक सीमित नहीं रही। विधायक ने आउटसोर्स एजेंसियों के एम्पैनलमेंट की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया। सरकार से पूछा गया कि नई एजेंसियों को अनुबंध किस आधार पर दिए गए, किन मानकों के तहत उनका चयन किया गया और किन परिस्थितियों में किसी एजेंसी को एम्पैनलमेंट से बाहर किया गया।
आउटसोर्स एजेंसियों के एम्पैनलमेंट को लेकर हाईकोर्ट में पहुंचे मामलों और उनसे जुड़े फैसलों का मुद्दा भी सदन में उठा। विपक्ष ने सरकार से पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
नर्सों की आउटसोर्स भर्ती बंद, अब लिखित परीक्षा से होगी नियुक्ति
स्वास्थ्य क्षेत्र में आउटसोर्स व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि नर्सों को आउटसोर्स के माध्यम से भर्ती करने की व्यवस्था समाप्त की जाएगी। अब स्टाफ नर्सों की भर्ती राज्य की रोजगार प्रक्रिया के तहत लिखित परीक्षा के माध्यम से की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 61 स्टाफ नर्सों की भर्ती हो चुकी है, जबकि करीब 600 नर्सों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। सरकार का लक्ष्य अगले चार से पांच महीनों में मेडिकल कॉलेजों में बेहतर गुणवत्ता वाला नर्सिंग स्टाफ उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि बीएससी और पोस्ट बीएससी नर्सिंग करने वाले अभ्यर्थियों का मेरिट स्तर भी अच्छा है। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि मेडिकल कॉलेजों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण नर्सिंग स्टाफ उपलब्ध कराया जाए।
हर आउटसोर्स भर्ती बंद नहीं होगी, पैरामेडिकल सेवाओं में जरूरत के मुताबिक जारी रहेगी
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार सभी प्रकार की आउटसोर्सिंग को एक साथ समाप्त नहीं करेगी। रेडियोग्राफर और अन्य पैरामेडिकल सेवाओं में जहां कर्मचारियों की कमी है, वहां आवश्यकता के अनुसार आउटसोर्स सेवाओं का सहारा लिया जाता रहेगा।
उन्होंने सुंदरनगर के ऑक्सीजन प्लांट का उदाहरण देते हुए कहा कि तकनीकी प्रकृति के ऐसे कार्यों में नियमित भर्ती की प्रक्रिया पूरी होने में छह से आठ महीने लग सकते हैं। ऐसे में जब तक नियमित व्यवस्था नहीं हो जाती या प्लांट किसी निजी एजेंसी को नहीं सौंपा जाता, तब तक आवश्यक सेवाओं को जारी रखने के लिए दो कर्मचारियों को आउटसोर्स के माध्यम से लगाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ऐसी व्यवस्था स्थायी आउटसोर्स भर्ती के बजाय आवश्यक सेवाओं को बाधित होने से बचाने के लिए अस्थायी रूप से की जाएगी।
कोविड में सेवाएं देने वालों को दोबारा मौका
विपक्ष ने सत्ता परिवर्तन के बाद पूर्व सरकार के कार्यकाल में रखे गए आउटसोर्स कर्मचारियों को हटाने का मुद्दा भी उठाया। इस पर मुख्यमंत्री ने कोविड काल में सेवाएं देने वाले कर्मचारियों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि टांडा और आईजीएमसी में कोविड के दौरान सेवाएं देने वाले कर्मचारियों में से जरूरत और पात्रता के आधार पर कुछ लोगों को दोबारा रखने की व्यवस्था की गई है। यदि किसी कर्मचारी ने कोविड काल में सेवाएं दी हैं और वह मौजूदा पात्रता एवं जरूरत के दायरे में आता है तो उसे दोबारा अवसर देने पर सरकार विचार कर रही है।
आउटसोर्स सेवाओं में आरक्षण रोस्टर का सवाल
विधानसभा में आउटसोर्स सेवाओं में आरक्षण व्यवस्था को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल उठा। विपक्ष की ओर विधायक हंसराज ने पूछा कि आउटसोर्स एजेंसियों और ठेकेदारों के माध्यम से होने वाली नियुक्तियों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी, खेल कोटा और पूर्व सैनिकों को अवसर कैसे सुनिश्चित किया जाता है।
सवाल यह भी उठाया गया कि आउटसोर्स व्यवस्था में संविधान की समानता और सामाजिक न्याय की भावना के अनुरूप आरक्षण रोस्टर लागू होता है या नहीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार मेरिट के साथ कोई भेदभाव नहीं करेगी। साथ ही उन्होंने यह अंतर स्पष्ट किया कि सरकार जब किसी पद पर सीधे कर्मचारी की भर्ती करती है तो प्रक्रिया अलग होती है, जबकि आउटसोर्स व्यवस्था में किसी सेवा को एजेंसी के माध्यम से लिया जाता है और कर्मचारी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी की होती है।
विपक्ष का आरोप- ठेकेदारों को बढ़ावा दे रही सरकार
बहस के दौरान विपक्ष ने सरकार पर आउटसोर्स व्यवस्था के जरिए ठेकेदारों और एजेंसियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना था कि बेरोजगारों को रोजगार देने के बजाय ऐसी व्यवस्था तैयार हो गई है, जिसमें एजेंसियों और ठेकेदारों की भूमिका बढ़ गई है।
विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों को आउटसोर्स व्यवस्था का लाभ पहुंचाया जा रहा है। सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और मेरिट को प्राथमिकता दी जा रही है।
नियमितीकरण और नौकरी की सुरक्षा पर भी सरकार से जवाब तलब
विधायक की ओर से आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण, नौकरी की सुरक्षा, वेतन वृद्धि और विभिन्न विभागों में स्वीकृत पदों को भरने को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा गया। बहस के दौरान यह सवाल प्रमुखता से उठा कि वर्षों से आउटसोर्स व्यवस्था के तहत काम कर रहे कर्मचारियों के भविष्य को लेकर सरकार की नीति क्या है।
सरकार के जवाबों से संकेत मिला कि फिलहाल सभी आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने के बजाय सरकार अलग-अलग सेवाओं की आवश्यकता, नियमित भर्ती की उपलब्धता और संबंधित योजनाओं के आधार पर व्यवस्था तय करेगी।
विधानसभा में आउटसोर्स व्यवस्था पर सरकार की नीति हुई स्पष्ट
बुधवार की चर्चा में आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़े लगभग सभी प्रमुख पहलू सदन में सामने आए। एजेंसियों के एम्पैनलमेंट से लेकर भर्ती में कथित वसूली, राजनीतिक सिफारिश, मेरिट आधारित चयन, कोविड कर्मियों को दोबारा अवसर, नर्सों की आउटसोर्स भर्ती खत्म करने, पैरामेडिकल सेवाओं में जरूरत के मुताबिक आउटसोर्सिंग जारी रखने और आरक्षण व्यवस्था तक विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा।
मुख्यमंत्री के जवाब से सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट हुई कि जहां नियमित भर्ती संभव है, वहां आउटसोर्स व्यवस्था को कम किया जाएगा, जबकि आवश्यक तकनीकी और पैरामेडिकल सेवाओं में जरूरत के मुताबिक आउटसोर्सिंग जारी रह सकती है। वहीं नर्सिंग क्षेत्र में सरकार ने आउटसोर्स मॉडल से हटकर लिखित परीक्षा के जरिए भर्ती करने का फैसला सामने रखा है।
विधानसभा की यह चर्चा इसलिए भी अहम रही कि पहली बार सरकार की ओर से आउटसोर्स भर्ती में राजनीतिक सिफारिश को पूरी तरह नकारते हुए लिखित परीक्षा और मेरिट आधारित चयन पर जोर दिया गया। साथ ही बेरोजगारों से कथित वसूली के आरोपों पर कार्रवाई का भरोसा और कोविड कर्मियों को पात्रता के आधार पर दोबारा अवसर देने की बात भी सामने आई।











