शिमला-नाहन फोरलेन के 16 किमी हिस्से के भूमि अधिग्रहण का खर्च राज्य से लेने के प्रस्ताव पर सदन में उठे सवाल
केंद्र राशि देता है तो प्रभावितों को चार गुना मुआवजा देने में प्रदेश को कोई आपत्ति नहीं
भूमि अधिग्रहण का खर्च हिमाचल पर तो टोल वसूली में भी प्रदेश की हिस्सेदारी का मुद्दा उठा
शिमला। शिमला-नाहन फोरलेन परियोजना के करीब 16 किलोमीटर हिस्से के लिए भूमि अधिग्रहण का खर्च हिमाचल सरकार से वहन करवाने के प्रस्ताव को लेकर विधानसभा में सवाल उठे। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार इस मामले को केंद्र के समक्ष उठा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भूमि अधिग्रहण का खर्च भी प्रदेश को ही उठाना है तो फिर सड़क निर्माण और उससे होने वाली टोल वसूली में प्रदेश की भूमिका क्यों न हो।
विधानसभा में मामला उठाते हुए विधायक ने कहा कि शिमला-नाहन मार्ग पर फोरलेन और टनलिंग का काम चल रहा है। अब परियोजना के करीब 16 किलोमीटर हिस्से के लिए भूमि अधिग्रहण का खर्च राज्य सरकार से वहन करवाने की बात सामने आई है। विधायक ने कहा कि यदि जमीन खरीदने के लिए पैसा प्रदेश सरकार को देना है और जमीन अधिग्रहण कर केंद्र को उपलब्ध करवानी है, तो प्रदेश को खुद सड़क बनाने और टोल वसूली का अधिकार भी मिलना चाहिए।
केंद्र राशि दे तो चार गुना मुआवजे पर सरकार तैयार
भूमि अधिग्रहण के बदले प्रभावित परिवारों को चार गुना मुआवजा देने का मुद्दा भी सदन में उठा। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि यदि भूमि अधिग्रहण की पूरी राशि केंद्र सरकार उपलब्ध करवाती है तो प्रभावित लोगों को चार गुना मुआवजा देने में प्रदेश सरकार को कोई आपत्ति नहीं है।
सरकार के अनुसार मुख्य मुद्दा मुआवजे की राशि से ज्यादा भूमि अधिग्रहण का वित्तीय बोझ है। यदि केंद्र सरकार परियोजना के लिए आवश्यक राशि उपलब्ध करवाती है तो प्रदेश सरकार प्रभावित लोगों को नियमानुसार बेहतर मुआवजा देने के लिए तैयार है।
भूमि अधिग्रहण का खर्च प्रदेश पर तो टोल पर भी सवाल
सदन में राष्ट्रीय राजमार्गों पर एनएचएआई की ओर से की जाने वाली टोल वसूली का मुद्दा भी उठाया गया। विधायक ने कहा कि यदि किसी फोरलेन परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का आर्थिक बोझ प्रदेश सरकार को उठाना पड़ता है तो सड़क बनने के बाद वसूले जाने वाले टोल राजस्व में प्रदेश की भूमिका पर भी विचार होना चाहिए।
विधायक ने सरकार से इस व्यवस्था को केंद्र के समक्ष मजबूती से उठाने की मांग की, ताकि फोरलेन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण का अतिरिक्त आर्थिक बोझ हिमाचल पर न पड़े और राज्य के हित भी सुरक्षित रहें।











