शी-बॉक्स की तर्ज पर हिमाचल में बनेगा डिजिटल पोर्टल, पहचान छिपाकर महिलाएं दर्ज करा सकेंगी शिकायत; तीन साल में 131 मामले सामने आए
शिमला। हिमाचल प्रदेश में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का सामना करने वाली महिलाओं के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि महिला उत्पीड़न की शिकायतों में शिकायतकर्ता की पहचान और गोपनीयता पूरी तरह सुरक्षित रखी जाएगी। इसके लिए सरकार नियमों में आवश्यक बदलाव करेगी। साथ ही, दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मानसून विधानसभा सत्र के दौरान विधायक मलेंद्र राजन के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि कई महिलाएं सामाजिक दबाव और बदनामी के डर से अपनी पीड़ा खुलकर सामने नहीं रख पातीं। ऐसे में शिकायत की प्रक्रिया को इस तरह बनाया जाएगा कि महिलाओं को अपनी पहचान उजागर करने का डर न रहे।
शी-बॉक्स की तर्ज पर राज्य का अपना डिजिटल पोर्टल
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल ने बताया कि केंद्र सरकार के शी-बॉक्स पोर्टल की तर्ज पर हिमाचल में भी महिलाओं के लिए अपना डिजिटल पोर्टल शुरू करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। इसके जरिए महिलाएं पहचान सार्वजनिक किए बिना यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज करा सकेंगी। शिकायत पर हुई कार्रवाई की स्थिति भी ऑनलाइन देखी जा सकेगी।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का शी-बॉक्स पोर्टल कामकाजी महिलाओं को पॉश एक्ट, 2013 के तहत सीधे और गोपनीय तरीके से शिकायत दर्ज कराने की सुविधा देता है। इसी व्यवस्था को हिमाचल में प्रभावी तरीके से लागू करने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है।
तीन साल में 131 शिकायतें, 37 मामलों में कार्रवाई
मंत्री ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में सरकारी, अर्द्धसरकारी और निजी कार्यस्थलों के अलावा शिक्षण संस्थानों में महिला उत्पीड़न से जुड़े 131 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें से 37 मामलों में कार्रवाई की गई है। तीन मामलों में कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया, जबकि एक मामले में गंभीर दंड और एक में निलंबन की कार्रवाई हुई।
इसके अलावा दो मामलों में एफआईआर, दो में चार्जशीट और नौ मामलों में कर्मचारियों के तबादले किए गए। 19 मामलों को आपसी सहमति से सुलझाया गया, जिसमें माफीनामे के साथ चेतावनी जारी की गई।
हर जिले में अधिकारी नियुक्त, जागरूकता पर भी जोर
डॉ. शांडिल ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए सरकार ने सभी जिलों के उपायुक्तों को जिला अधिकारी नियुक्त किया है। उन्होंने कहा कि यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर मामलों से निपटने के लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है। समाज में जागरूकता बढ़ाने और महिलाओं के प्रति सोच में बदलाव लाना भी जरूरी है। उन्होंने इस विषय को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि महिला उत्पीड़न की शिकायतों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार का फोकस अब ऐसी व्यवस्था बनाने पर है, जिसमें महिला बिना डर और पहचान उजागर किए शिकायत कर सके और दोषी के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित हो।











