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राष्ट्रगान के अपमान के मुद्दे पर सियासत तेज, मुख्यमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस

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जयराम ठाकुर बोले- मुख्यमंत्री क्षमा मांगें, नहीं तो क्रिमिनल डिफेमेशन पर भी करेंगे विचार; विपक्ष का आरोप- सदन में 75 लाख जनता के प्रतिनिधियों के खिलाफ बोला गया झूठ


शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक टकराव के साथ-साथ विशेषाधिकार हनन के नोटिस तक पहुंच गया है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने बुधवार को कहा कि विपक्ष ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष को विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने सदन के भीतर प्रदेश की करीब 75 लाख जनता के प्रतिनिधियों के खिलाफ झूठ बोला है। जयराम ठाकुर ने स्पष्ट किया कि यदि मुख्यमंत्री अपने बयान पर क्षमा मांगते हैं तो विपक्ष इस मामले को आगे नहीं बढ़ाएगा, लेकिन ऐसा नहीं होने पर कानूनी विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा।


राष्ट्रगान के अपमान के आरोपों पर मांगी वीडियो फुटेज


जयराम ठाकुर ने कहा कि विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले ही मुख्यमंत्री की ओर से यह स्पष्ट संदेश दिया गया था कि सदन में वंदेमातरम नहीं गाया जाएगा। इसके बावजूद सत्र शुरू होने पर सदन में राष्ट्रगान सभी सदस्यों ने पूरे सम्मान के साथ गाया।

उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठने के बाद संपूर्ण वंदेमातरम का गायन हुआ और राष्ट्रगान भी गाया गया।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विपक्ष की ओर से बार-बार आग्रह किए जाने के बाद उन्हें राष्ट्रगान से संबंधित सदन की वीडियो फुटेज उपलब्ध कराई गई। उनका कहना था कि फुटेज में जो स्थिति सामने आई है, उसके आधार पर यदि विपक्ष के किसी सदस्य ने राष्ट्रगान का अपमान किया है तो वे स्वयं उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए तैयार हैं।


जयराम ठाकुर ने कहा कि विपक्ष ने किसी भी स्तर पर राष्ट्रगान के अपमान का समर्थन नहीं किया है। यदि किसी सदस्य से ऐसा हुआ है तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन उन्होंने मुख्यमंत्री पर विपक्ष के सदस्यों को लेकर सदन में गलत तथ्य रखने का आरोप लगाया।


‘मुख्यमंत्री कानून से ऊपर नहीं’


जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री यदि अपने बयान के लिए क्षमा मांग लेते हैं तो विपक्ष इस मामले को यहीं समाप्त करने को तैयार है। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि मुख्यमंत्री कानून से ऊपर नहीं हैं और यदि वह अपने बयान पर माफी नहीं मांगते हैं तो विपक्ष विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई के साथ-साथ क्रिमिनल डिफेमेशन यानी आपराधिक मानहानि के कानूनी विकल्प पर भी विचार करेगा।


उन्होंने उम्मीद जताई कि विधानसभा अध्यक्ष को दिए गए विशेषाधिकार हनन के नोटिस पर सदन के नियमों के अनुसार कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि यह केवल विपक्ष और सरकार के बीच राजनीतिक विवाद का विषय नहीं है, बल्कि सदन की गरिमा और उसमें चुने हुए जनप्रतिनिधियों के सम्मान से जुड़ा मामला है।


मंत्री जगत सिंह नेगी पर भी साधा निशाना


राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के मुद्दे पर जयराम ठाकुर ने राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी पर भी बिना नाम लिए निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से इस मुद्दे पर दिए जा रहे जवाब तर्कसंगत नहीं हैं और मंत्री तर्क के बजाय कुतर्क कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री पर भी इसी तरह कुतर्क करने का आरोप लगाया।


जयराम ठाकुर ने सवाल उठाया कि यदि राष्ट्रगीत का गायन किसी तरह का विवादित विषय है तो कांग्रेस शासित अन्य राज्यों में राष्ट्रगीत गाए जाने को लेकर आपत्ति क्यों नहीं होती। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान को लेकर राजनीति नहीं होनी चाहिए तथा सदन में राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।


आउटसोर्स भर्ती पर भी सरकार को घेरा


नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा में आउटसोर्स भर्ती के मुद्दे पर भी राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आउटसोर्स के माध्यम से अपने पदाधिकारियों और विधायकों से जुड़े लोगों को काम देने की कोशिश कर रही है और अपने लोगों की बेरोजगारी दूर करने में लगी हुई है।


उन्होंने कहा कि आउटसोर्स एजेंसियों की कार्यप्रणाली को लेकर उच्च न्यायालय भी चिंता जता चुका है। ऐसे में सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आउटसोर्स भर्ती की प्रक्रिया किस आधार पर चल रही है और इसमें पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जा रही है।
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में हैं, लेकिन सरकार नियमित भर्ती और रोजगार के स्थायी अवसर उपलब्ध कराने के बजाय आउटसोर्स व्यवस्था पर निर्भर दिखाई दे रही है। उन्होंने सरकार से भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और युवाओं को स्थायी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की मांग की।


विधानसभा में बढ़ सकता है टकराव


राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ता विवाद अब विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष पहुंच गया है। विपक्ष की ओर से मुख्यमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिए जाने के बाद आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सदन के भीतर सियासी टकराव और बढ़ने के आसार हैं। विपक्ष ने जहां मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगने की मांग की है, वहीं सरकार की ओर से इस पूरे मामले पर दिए जाने वाले जवाब पर सभी की नजरें रहेंगी।


विपक्ष ने साफ कर दिया है कि वह इस मुद्दे को केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि इसे विधानसभा की प्रक्रिया और विशेषाधिकार से जोड़कर आगे ले जाएगा। ऐसे में अब यह मामला विधानसभा अध्यक्ष के स्तर पर किस दिशा में जाता है, यह महत्वपूर्ण होगा।