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जिला परिषद पर सियासी दंगल: पंचकूला ले जाए जाने पर सुक्खू का जयराम पर वार, बोले- सदस्यों के साथ धरने पर बैठते तो बेहतर होता

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जिला परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री ने भाजपा पर साधा निशाना
कहा- चुनाव होना तय, जल्द घोषित होगी तारीख; पूछा- भाजपा को सदस्यों को होटल-दर-होटल रखने की जरूरत क्यों पड़ी?


शिमला। शिमला जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर हिमाचल की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। जिला परिषद सदस्यों को पंचकूला ले जाने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर पर सीधा राजनीतिक हमला बोला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जयराम ठाकुर को जिला परिषद सदस्यों को पंचकूला ले जाने के बजाय उनके साथ धरने पर बैठना चाहिए था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सदस्यों को अलग-अलग जगह घुमाने से बेहतर होता कि नेता प्रतिपक्ष उनके साथ बैठकर उनकी मांगों को लेकर आवाज उठाते।


मुख्यमंत्री सोमवार को अपने सरकारी आवास से शिमला जिले के नेरवा में नवनिर्मित अग्निशमन चौकी का वर्चुअली लोकार्पण करने के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने शिमला जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर भाजपा पर निशाना साधा।


चुनाव को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट, जल्द आएगी तारीख
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव होना निश्चित है और जल्द ही इसकी तारीख भी घोषित की जाएगी। उन्होंने कहा कि शिमला उपायुक्त की ओर से बैठक बुलाई गई थी, लेकिन भाजपा जिला परिषद सदस्यों को लेकर पंचकूला पहुंच गई।


मुख्यमंत्री के मुताबिक, बैठक के दौरान शिमला के उपायुक्त जिला परिषद सदस्यों के आने का इंतजार करते रहे, लेकिन सदस्य बैठक में नहीं पहुंचे। इसी घटनाक्रम को लेकर मुख्यमंत्री ने भाजपा की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर ऐसी क्या स्थिति है कि जिला परिषद सदस्यों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा रहा है और उन्हें होटल में रखा जा रहा है।


‘जयराम सदस्यों के साथ धरने पर बैठते तो ज्यादा बेहतर होता’
मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि यदि जिला परिषद सदस्यों के साथ कोई समस्या है तो उनके साथ धरने पर बैठना ज्यादा बेहतर विकल्प होता। उन्होंने कहा कि सदस्यों को पंचकूला ले जाने के बजाय उनकी बात सरकार और प्रशासन के सामने रखी जानी चाहिए थी।


सुक्खू ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि अभी भाजपा के लोग जिला परिषद सदस्यों को लेकर और भी कहीं घुमाएं। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि भाजपा को आखिर कौन सा डर सता रहा है, जिसके चलते जिला परिषद सदस्यों को इस तरह अलग-अलग होटल में रखा जा रहा है।


जिला परिषद चुनाव बना शक्ति प्रदर्शन का मुद्दा


शिमला जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव अब महज स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह कांग्रेस और भाजपा के बीच स्थानीय स्तर पर राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। जिला परिषद में बहुमत और अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर दोनों दलों की सक्रियता ने इस मुकाबले को राजनीतिक रूप से अहम बना दिया है।


भाजपा की ओर से सदस्यों को अपने साथ रखना जहां संभावित राजनीतिक खेमेबंदी के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं मुख्यमंत्री का लगातार इस मुद्दे पर बयान देना यह संकेत देता है कि सरकार भी जिला परिषद चुनाव के घटनाक्रम को गंभीरता से ले रही है।


मुख्यमंत्री ने एक बार फिर कहा कि जिला परिषद और बीडीसी सदस्यों की अहमियत अक्सर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव तक ही सीमित रह जाती है। उनका यह बयान सीधे तौर पर उन राजनीतिक दलों पर निशाना माना जा रहा है जो चुनाव के समय सदस्यों को अपने पक्ष में लामबंद करने के लिए सक्रिय होते हैं।


‘अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव तक ही याद आते हैं सदस्य’


मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला परिषद और बीडीसी सदस्यों की अहमियत केवल अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव तक ही रहती है। राजनीतिक दल चुनाव के समय सदस्यों को महत्वपूर्ण मानते हैं, लेकिन उसके बाद उनकी भूमिका और समस्याओं को उतनी प्राथमिकता नहीं मिलती।


सुक्खू का यह बयान ग्रामीण राजनीति में जिला परिषद और बीडीसी सदस्यों की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक बहस को जन्म देता है। माना जा रहा है कि सरकार आने वाले समय में पंचायती राज संस्थाओं के सदस्यों के अधिकारों और भूमिका के मुद्दे को भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बना सकती है।


नेरवा को मिली अग्निशमन चौकी, दो दमकल वाहन भी रवाना
इस राजनीतिक मुद्दे के बीच मुख्यमंत्री ने सोमवार को शिमला जिले के चौपाल क्षेत्र के नेरवा में नवनिर्मित अग्निशमन चौकी का वर्चुअली लोकार्पण किया। इसके साथ ही दो दमकल वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि अपने नेरवा दौरे के दौरान उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में अग्निशमन वाहन की आवश्यकता महसूस की थी। इसी आवश्यकता को देखते हुए वर्ष 2024 में की गई घोषणा को अब पूरा किया गया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में आग की घटनाओं से निपटने के लिए दमकल सेवाओं को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है।


55 करोड़ से आधुनिक होगा अग्निशमन विभाग


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार करीब 55 करोड़ रुपये की लागत से अग्निशमन विभाग को आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसका उद्देश्य प्रदेश में अग्निशमन सेवाओं को अधिक प्रभावी, आधुनिक और त्वरित बनाना है।


नेरवा में अग्निशमन चौकी शुरू होने से चौपाल क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों को आपात स्थिति में दमकल सेवा जल्द उपलब्ध हो सकेगी। खासकर दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर अग्निशमन सुविधा उपलब्ध होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


राजनीतिक संदेश साफ


मुख्यमंत्री के सोमवार के बयान में एक तरफ नेरवा को अग्निशमन सुविधा देने और सरकार की विकास योजनाओं का उल्लेख रहा, तो दूसरी तरफ शिमला जिला परिषद चुनाव को लेकर भाजपा पर तीखा राजनीतिक हमला भी देखने को मिला। जयराम ठाकुर और भाजपा की ओर से सदस्यों को पंचकूला ले जाने का मुद्दा अब कांग्रेस सरकार के लिए भी राजनीतिक जवाब देने का विषय बन गया है।


ऐसे में जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव की तारीख घोषित होने के बाद शिमला में स्थानीय निकाय की राजनीति और अधिक दिलचस्प होने की संभावना है। चुनाव परिणाम केवल दो पदों का फैसला नहीं करेंगे, बल्कि इसे कांग्रेस और भाजपा के बीच जमीनी राजनीतिक प्रभाव और संगठनात्मक पकड़ के परीक्षण के तौर पर भी देखा जाएगा।