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राष्ट्रीय गान के मुद्दे पर परमार का सुक्खू पर पलटवार, बोले- जनता को गुमराह करने के लिए मांगें माफी

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राष्ट्रीय गीत को लेकर विवाद खड़ा करने का आरोप, परमार बोले- संवैधानिक मर्यादाओं और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान जरूरी


शिमला। राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय गीत को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के बयानों पर भाजपा विधायक एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने तीखा पलटवार किया है। परमार ने मुख्यमंत्री पर प्रदेश की जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें इस मामले में जनता से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान के मुद्दे को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है।


15 अगस्त के कार्यक्रम का दिया हवाला


परमार ने कहा कि 15 अगस्त को राष्ट्रीय गीत का संपूर्ण गीत गाया गया था। इसके बावजूद मुख्यमंत्री की ओर से राष्ट्रीय गान के अपमान की बात कही गई, जिससे प्रदेश में गलत संदेश गया। उन्होंने कहा कि वास्तविक तथ्यों को सामने रखे बिना इस तरह के बयान देना उचित नहीं है। इस मामले को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष भी उठाया गया था।


विपक्ष ने विधानसभा में राष्ट्रीय गान का पूरा सम्मान किया
भाजपा विधायक ने कहा कि विधानसभा का मानसून सत्र 21 अगस्त को शुरू हुआ और विपक्ष ने राष्ट्रीय गान को पूरी गरिमा और सम्मान के साथ सुना। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय गीत देश की अस्मिता से जुड़े विषय हैं और इनके सम्मान को लेकर किसी तरह का भ्रम पैदा नहीं किया जाना चाहिए।
‘संविधान से बड़ा कोई नहीं’


परमार ने कहा कि संविधान से बड़ा कोई नहीं है और संवैधानिक संस्थाओं व राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को राजनीतिक बयानबाजी के बजाय तथ्यों को स्पष्ट करना चाहिए। यदि उनके बयान से प्रदेश की जनता के बीच गलत संदेश गया है तो उन्हें माफी मांगनी चाहिए।


राष्ट्रीय प्रतीकों को राजनीति से दूर रखने की नसीहत


परमार ने कहा कि देश के विभाजन का इतिहास सभी जानते हैं और राष्ट्रीय एकता से जुड़े विषयों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय गीत जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बयान देने से पहले तथ्यों की पूरी जानकारी लें और संवैधानिक मर्यादाओं का ध्यान रखें।