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सियासत से संन्यास की ओर कौल सिंह: संत रामपाल के आश्रम से दिए संकेत, हिमाचल की राजनीति में नई चर्चा

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करीब पांच दशक तक प्रदेश की राजनीति के केंद्र में रहे कांग्रेस के दिग्गज नेता बोले-,अब समाजसेवा और आध्यात्मिक कार्यों की ओर झुकाव
संत रामपाल को हिमाचल आने का दिया न्योता


शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक प्रभावशाली भूमिका निभाने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने के संकेत देकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। हरियाणा स्थित संत रामपाल जी महाराज के आश्रम में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उनके वक्तव्य का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।


आश्रम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि अब उनका मन राजनीति से अधिक समाजसेवा और आध्यात्मिक कार्यों की ओर आकर्षित हो रहा है। उन्होंने आश्रम में चल रही विभिन्न सामाजिक गतिविधियों की सराहना करते हुए संत रामपाल जी महाराज को हिमाचल प्रदेश आने का निमंत्रण भी दिया। उनका यह बयान संत रामपाल जी के आधिकारिक फेसबुक पेज पर साझा किए गए वीडियो के बाद व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।


हालांकि कौल सिंह ठाकुर ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन उनके वक्तव्य को राजनीतिक विश्लेषक सार्वजनिक जीवन की नई दिशा की ओर बढ़ते कदम के रूप में देख रहे हैं। ऐसे समय में जब प्रदेश कांग्रेस संगठनात्मक चुनौतियों और नई पीढ़ी के नेतृत्व को लेकर मंथन के दौर से गुजर रही है, कौल सिंह ठाकुर के संकेतों ने कई नए राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं।


मंडी जिले के द्रंग विधानसभा क्षेत्र से कौल सिंह ठाकुर का राजनीतिक सफर वर्ष 1977 में शुरू हुआ था। इसके बाद करीब पांच दशक तक वह प्रदेश की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने गए। अपने लंबे राजनीतिक जीवन में वह चार बार प्रदेश सरकार में मंत्री रहे। इसके अलावा उन्होंने हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और हिमाचल विधानसभा के अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी भी संभाली।


हाल के वर्षों में उनका राजनीतिक सफर चुनौतियों से भी गुजरा। वर्ष 1990 में उन्हें दीनानाथ शास्त्री से चुनावी हार मिली थी। इसके बाद वर्ष 2017 में भाजपा के जवाहर ठाकुर ने उन्हें पराजित किया, जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी पूर्ण चंद ठाकुर ने उन्हें शिकस्त दी। लगातार दो चुनावी हार के बाद सक्रिय राजनीति में उनकी भूमिका पहले जैसी नहीं रही।


प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठतम नेताओं में शामिल कौल सिंह ठाकुर के इस बयान को राजनीतिक हलकों में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। यदि आने वाले समय में वह औपचारिक रूप से सक्रिय राजनीति से संन्यास की घोषणा करते हैं तो इसे हिमाचल की कांग्रेस राजनीति के एक लंबे और प्रभावशाली अध्याय के समापन के रूप में देखा जाएगा। फिलहाल सबकी निगाहें उनके अगले कदम और संभावित औपचारिक घोषणा पर टिकी हुई हैं।