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खनन से 356 करोड़ की रॉयल्टी, ब्यास की ड्रेजिंग से बढ़ सकती है प्रदेश की आय; अलग विभाग बनाने की तैयारी: मुख्यमंत्री

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विधायक ने रेजिंग पॉलिसी बनाने और ड्रेजिंग से निकलने वाली सामग्री की नीलामी का मुद्दा उठाया, एफसीआई की अड़चन दूर करने के लिए केंद्र से भी चर्चा


शिमला। हिमाचल प्रदेश में नदियों की ड्रेजिंग और खनन से निकलने वाली सामग्री के बेहतर उपयोग के जरिए सरकार की आय बढ़ाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विधानसभा में कहा कि ब्यास समेत प्रदेश की अन्य नदियों में ड्रेजिंग से निकलने वाले मटेरियल की नीलामी करवाई जाए तो सरकार को बड़ी मात्रा में राजस्व प्राप्त हो सकता है।

इसके लिए सरकार रेजिंग पॉलिसी तैयार करने के साथ खनन से होने वाली आय बढ़ाने के लिए अलग विभाग बनाने पर भी विचार कर रही है।


मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2023 की आपदा के बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कुल्लू में ब्यास नदी की ड्रेजिंग करवाने का सुझाव दिया था। इसके बाद संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति लेकर ड्रेजिंग शुरू की गई। हालांकि उस समय ड्रेजिंग की अनुमति तो मिल गई थी, लेकिन माइनिंग की अनुमति नहीं मिलने के कारण निकाली गई सामग्री का समुचित उपयोग नहीं हो सका। मुख्यमंत्री के अनुसार अगली बरसात में नदी से निकाला गया काफी मटेरियल दोबारा बह गया।


इसके बाद कुल्लू में तीन साइट चिह्नित की गईं और माइनिंग विभाग से ड्रेजिंग का अधिकार मिलने के बाद वहां काम करवाया गया। ड्रेजिंग में लगी एजेंसियों ने माइनिंग विभाग से डब्ल्यू-फॉर्म के लिए आवेदन किया और उन्हें फॉर्म जारी किए गए।


रॉयल्टी 240 करोड़ से बढ़कर 356 करोड़


विधानसभा में सरकार ने बताया कि नई माइनिंग पॉलिसी के बाद प्रदेश में खनन से मिलने वाली रॉयल्टी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2022 में करीब 240 करोड़ रुपये की रॉयल्टी प्राप्त हुई थी, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 356 करोड़ रुपये हो गई। वर्ष 2026 में यह राशि करीब 340 करोड़ रुपये रही। इसमें लगभग 100 करोड़ रुपये डीएमएफटी के माध्यम से प्राप्त होते हैं।


सरकार का कहना है कि ड्रेजिंग और माइनिंग को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाकर राजस्व में और इजाफा किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में नदियों की ड्रेजिंग से सरकार को बड़े स्तर पर राजस्व मिल रहा है। हिमाचल में भी इसी तरह व्यवस्थित व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है।


रेजिंग के लिए अलग नीति की जरूरत


विधानसभा में चर्चा के दौरान सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि रेजिंग और माइनिंग अलग-अलग विषय हैं, इसलिए प्रदेश में रेजिंग को लेकर अलग नीति बनाने की आवश्यकता है। इसके लिए दूसरे राज्यों की नीतियों के साथ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को भी आधार बनाया जा सकता है।


सरकार की योजना है कि जहां केंद्र से एफसीआई की अनुमति मिलने के बाद ड्रेजिंग अथवा रेजिंग करवाई जाए, वहां निकलने वाली अतिरिक्त सामग्री को नीलाम किया जाए। इससे नदी-नालों की सफाई के साथ-साथ प्रदेश को राजस्व भी मिल सकेगा।


एफसीआई की अड़चन से करोड़ों का मटेरियल अटका


रेजिंग से निकलने वाली सामग्री को उठाने में एफसीआई की अनुमति बड़ी अड़चन बनी हुई है। सरकार ने बताया कि कुल्लू में वर्ष 2023 में 34 साइटों से सामग्री निकालकर किनारे लगाई गई थी। इसकी नीलामी से करीब 2.64 करोड़ रुपये की राशि तय हुई थी और 25 प्रतिशत राशि भी जमा हो चुकी थी। लेकिन क्षेत्र एफसीआई के अंतर्गत होने के कारण वन विभाग ने सामग्री उठाने की अनुमति नहीं दी। बाद में वर्ष 2025 के बाद इस सामग्री की दोबारा बिक्री की गई।


सरकार के अनुसार प्रदेश में वर्ष 2016 और 2019 में बड़ी संख्या में खनन साइटों की नीलामी की गई थी। वर्ष 2019 में करीब 324 साइटों की नीलामी हुई, लेकिन एफसीआई से जुड़ी औपचारिकताओं के कारण अधिकांश साइटों से सामग्री उठाने में दिक्कत आई। सरकारी भूमि पर एफसीआई की प्रक्रिया को भी जटिल बताया गया।


वन निगम ने निकाला 74 हजार टन मटेरियल


विधानसभा में हिमाचल प्रदेश वन निगम की ओर से किए जा रहे खनन का भी उल्लेख हुआ। सरकार ने बताया कि तीन क्षेत्रों में स्वीकृत माइनिंग प्लान के तहत अब तक करीब 74 हजार टन सामग्री निकाली जा चुकी है। इसकी राशि एम-फॉर्म के माध्यम से जमा करवाई गई है। वन निगम के तीन माइनिंग प्लान स्वीकृत हैं और प्रत्येक की क्षमता करीब पांच लाख टन है।


केंद्र के सामने उठाया एफसीआई का मुद्दा


मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में हिमाचल, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में एफसीआई से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की गई। बैठक में पर्यावरण और जल शक्ति मंत्रालय से जुड़े मंत्री भी मौजूद थे। हिमाचल सरकार ने ड्रेजिंग से निकलने वाली सामग्री के उपयोग और उस पर रॉयल्टी लेने का मुद्दा केंद्र के समक्ष उठाया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश का मानना है कि ड्रेजिंग से निकलने वाली सामग्री पर रॉयल्टी लेना राज्य का अधिकार है। सरकार इस सामग्री की नीलामी के जरिए राजस्व अर्जित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।


खनन की आय बढ़ाने को अलग विभाग पर सहमति


सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में खनन से होने वाली आय बढ़ाने के लिए अलग विभाग बनाने को लेकर उद्योग मंत्री के साथ सहमति बनी है। सरकार का उद्देश्य नदियों की ड्रेजिंग, रेजिंग और खनन को व्यवस्थित करना है, ताकि एक ओर बाढ़ और आपदा के जोखिम को कम किया जा सके और दूसरी ओर नदियों से निकलने वाली खनन सामग्री का आर्थिक उपयोग कर प्रदेश की आय बढ़ाई जा सके।


उन्होंने कहा कि ब्यास समेत अन्य नदियों में वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से ड्रेजिंग की जाए तो यह हिमाचल के लिए आपदा प्रबंधन के साथ-साथ राजस्व का भी बड़ा स्रोत बन सकती है।