बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी बोले- एमआईएस के तहत खरीद दर 12 से बढ़ाकर 13 रुपये करने का प्रस्ताव, कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार
शिमला। हिमाचल प्रदेश में इस बार सेब सीजन फीका रहा। मौसम की मार के चलते सेब उत्पादन प्रभावित हुआ और प्रदेश से करीब 1.23 करोड़ पेटियां ही बाजार तक पहुंच पाईं। वहीं, मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) के तहत सेब खरीद, भुगतान और खरीद दर में बढ़ोतरी को लेकर सरकार ने अपना पक्ष रखा है। बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि एमआईएस के तहत सेब खरीद की दर 12 रुपये से बढ़ाकर 13 रुपये प्रति किलो करने का प्रस्ताव है। हालांकि, इस पर अंतिम निर्णय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद ही होगा।
मंत्री ने एमआईएस के मुद्दे पर भाजपा पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने पिछली भाजपा सरकार से विरासत में मिली 114 करोड़ रुपये की देनदारी का भुगतान किया है। इसके अलावा योजना के तहत 262 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। सरकार का कहना है कि खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है।
इस साल 13 हजार मीट्रिक टन सेब की खरीद
जगत सिंह नेगी ने बताया कि एमआईएस के तहत इस वर्ष करीब 13 हजार मीट्रिक टन सेब की खरीद हुई है, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 79 हजार मीट्रिक टन था। खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ऐप भी शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से व्यवस्था की निगरानी और प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
11,285 बागवानों को हुआ भुगतान
बागवानी मंत्री के अनुसार, एमआईएस के तहत 30 बोरियों से कम सेब बेचने वाले 11,285 बागवानों को भुगतान किया गया है। वहीं, 2,827 बागवान ऐसे हैं, जिनसे 100 से कम बोरियों की खरीद हुई। इसके अलावा करीब 2,000 बागवान ऐसे हैं, जिनसे 100 से अधिक बोरियों की खरीद की गई है। उन्होंने बताया कि करीब 5,000 बागवानों ने अभी तक आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं करवाए हैं। इन दस्तावेजों के जमा होने के बाद संबंधित भुगतान प्रक्रिया पूरी करने में मदद मिलेगी।
12 से बढ़कर 13 रुपये हो सकती है खरीद दर
एमआईएस के तहत वर्ष 2023 में सेब खरीद की दर बढ़ाकर 12 रुपये प्रति किलो की गई थी। अब सरकार इसे बढ़ाकर 13 रुपये प्रति किलो करने की तैयारी में है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है, लेकिन मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलना अभी बाकी है। मंजूरी के बाद ही नई दर लागू करने पर अंतिम निर्णय लिया जा सकेगा।
सरकार का कहना है कि एमआईएस के तहत भुगतान संबंधी लंबित मामलों को निपटाने और खरीद व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, इस बार कम उत्पादन के कारण सेब कारोबार से जुड़े बागवानों और अन्य हितधारकों को सीजन में अपेक्षाकृत कम कारोबार का सामना करना पड़ा है।












