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सुधीर शर्मा के समर्थन में धर्मशाला में भाजपा का प्रदर्शन, एफआईआर की निष्पक्ष जांच की मांग

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राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर राजनीतिक प्रतिशोध के आरोपों की जांच की मांग; भाजपा बोली- सरकार से सवाल पूछना अपराध नहीं


धर्मशाला। धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा के समर्थन में भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए उनकी ओर से दर्ज एफआईआर की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की। भाजपा धर्मशाला मंडल की ओर से राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में FIR No. 05/2026, पुलिस थाना SV&ACB (विजिलेंस) और FIR No. 141/2026, पुलिस थाना धर्मशाला की जांच को राजनीतिक दबाव से मुक्त रखने की मांग की गई।


भाजपा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सुधीर शर्मा के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने और सरकार की नीतियों के खिलाफ मुखर रहने के बाद उनके खिलाफ लगातार कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध की आशंका पैदा करती है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की आवाज को एफआईआर और पुलिस कार्रवाई के जरिए दबाने का प्रयास लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।


‘सरकार से सवाल पूछना कब से अपराध हो गया?’


भाजपा कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया कि क्या सरकार की आलोचना करना अब अपराध हो गया है और क्या निर्वाचित विधायक को जनहित के मुद्दे उठाने के बदले पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार है।


ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विधिसम्मत प्रक्रिया से जुड़े अधिकारों का भी उल्लेख किया गया। भाजपा ने स्पष्ट किया कि वह किसी जांच को रोकने की मांग नहीं कर रही, बल्कि दोनों मामलों में निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच चाहती है।


कार्यकर्ताओं ने मांग की कि जांच में यदि राजनीतिक दबाव, दुर्भावना या तथ्यहीन आरोप सामने आते हैं तो कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए। जरूरत पड़ने पर किसी स्वतंत्र उच्चस्तरीय एजेंसी अथवा अधिकारी से जांच करवाने पर भी विचार करने की मांग की गई।


लॉ ऑफिसर्स की राजनीतिक भूमिका पर भी सवाल


वहीं, विधायक सुधीर शर्मा ने राज्यपाल और मुख्य सचिव को अलग-अलग प्रतिवेदन सौंपकर प्रदेश के कुछ सेवारत राज्य विधि अधिकारियों की कथित राजनीतिक गतिविधियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मीडिया में सामने आई जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश कांग्रेस लीगल सेल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐसे विधि अधिकारियों की भागीदारी की बात सामने आई है, जो सरकार में Additional Advocate General और Deputy Advocate General जैसे पदों पर कार्यरत हैं।


सुधीर शर्मा ने राज्यपाल से इस मामले में सरकार से रिपोर्ट तलब करने और यह जांच करवाने की मांग की है कि सेवारत विधि अधिकारियों की राजनीतिक गतिविधियों में भागीदारी उनकी नियुक्ति की शर्तों और सरकारी नीति के अनुरूप है या नहीं। उन्होंने मुख्य सचिव से भी मामले की समयबद्ध जांच की मांग की है।


भाजपा कार्यकर्ताओं ने कहा कि सरकार को दोनों मामलों में पारदर्शिता बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक लड़ाई राजनीतिक मैदान में लड़ी जानी चाहिए, पुलिस थानों और एफआईआर के माध्यम से नहीं। कार्यकर्ताओं ने कहा कि धर्मशाला की जनता अपने निर्वाचित विधायक के साथ खड़ी है और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाती रहेगी।