आरएस बाली ने जीरो आवर में उठाया ओबीसी प्रमाणपत्र की वैधता बढ़ाने और रेबीज संक्रमित पशुओं से निपटने का मुद्दा
स्वास्थ्य मंत्री ने जांच सुविधाएं मजबूत करने का दिया आश्वासन
शिमला। प्रदेश के जिन अस्पतालों में आवश्यक जांच सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, वहां सरकार जरूरी संसाधन और उपकरण उपलब्ध करवाने का प्रयास करेगी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल ने विधानसभा में यह आश्वासन नगरोटा बगवां के विधायक आरएस बाली की ओर से उठाए गए मुद्दे के जवाब में दिया। उन्होंने कहा कि कई बीमारियों का पता समय पर नहीं चल पाता, ऐसे में अस्पतालों में आवश्यक जांच की सुविधा उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है और जहां भी सुविधाओं की कमी है, वहां आवश्यक संसाधन उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जाएंगे।
ओबीसी प्रमाणपत्र की वैधता तीन से पांच साल करने की मांग
नगरोटा बगवां के विधायक आरएस बाली ने जीरो आवर में ओबीसी प्रमाणपत्र की वैधता बढ़ाने और इसे बनवाने की प्रक्रिया सरल करने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ओबीसी प्रमाणपत्र की वैधता एक वर्ष है, जिसके कारण लोगों को बार-बार प्रमाणपत्र बनवाने के लिए पटवारी, पंचायत सचिव और तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इससे लोगों का समय और पैसा दोनों खर्च होता है।
बाली ने कहा कि नौकरी के लिए आवेदन करते समय बड़ी संख्या में युवाओं को ओबीसी प्रमाणपत्र की आवश्यकता होती है। कई स्थानों पर पटवारी और पंचायत सचिव पहले से ही कार्यभार के दबाव में हैं, जिसके चलते प्रमाणपत्र समय पर जारी नहीं हो पाता। कई बार प्रमाणपत्र के इंतजार में नौकरी के आवेदन की अंतिम तिथि भी निकल जाती है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि ओबीसी प्रमाणपत्र की वैधता कम से कम तीन वर्ष और संभव हो तो पांच वर्ष की जाए। साथ ही प्रमाणपत्र जारी करने के लिए विभागीय स्तर पर समय सीमा तय करने और पूरी प्रक्रिया में लगने वाले शुल्क को भी एक जगह निर्धारित करने की मांग की, ताकि लोगों को अलग-अलग स्तर पर भुगतान न करना पड़े।
रेबीज संक्रमित पशुओं से छह लोग घायल, टास्क फोर्स को संसाधन देने की मांग
आरएस बाली ने अपने विधानसभा क्षेत्र में रेबीज संक्रमण से प्रभावित पशुओं का मामला भी सदन में उठाया। उन्होंने बताया कि संक्रमित कुत्तों के संपर्क में आने के बाद कुछ गाय और बैल आक्रामक हो गए और लोगों के पीछे दौड़ने लगे। इनके डर से भागते समय करीब छह लोग घायल हुए हैं।
विधायक ने बताया कि उन्होंने मामले को लेकर एसडीएम, बीसी, डीसी और पशुपालन विभाग के अधिकारियों से बातचीत की है। स्थिति से निपटने के लिए टास्क फोर्स भी गठित की गई है, लेकिन पशुओं को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित करने के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने सरकार से पशुपालन विभाग को आवश्यक संसाधन, उपकरण और अतिरिक्त कर्मचारी उपलब्ध करवाने की मांग की।
पकड़े गए पशुओं के लिए स्थायी व्यवस्था की जरूरत
बाली ने कहा कि रेबीज प्रभावित या संदिग्ध पशुओं को पकड़ने के बाद उन्हें सुरक्षित रखने और उनकी निगरानी की भी उचित व्यवस्था होनी चाहिए। इसके लिए प्रशासन, पशुपालन विभाग और आवश्यकता पड़ने पर गैर सरकारी संस्थाओं के सहयोग से स्थायी व्यवस्था विकसित करने की मांग उन्होंने सरकार से की।
अस्पतालों में जांच सुविधा मजबूत करने पर सरकार का जोर
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल ने कहा कि प्रदेश के अस्पतालों में आवश्यक जांच और उपचार संबंधी संसाधन उपलब्ध करवाने पर काम किया जा रहा है। जिन अस्पतालों में जरूरी जांच की सुविधा नहीं है, वहां आवश्यकता के अनुसार उपकरण और अन्य संसाधन उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि समय पर जांच होने से बीमारी का शुरुआती स्तर पर पता लगाया जा सकता है और मरीज का उपचार भी जल्द शुरू किया जा सकता है। सरकार का प्रयास है कि मरीजों को आवश्यक जांच के लिए अनावश्यक रूप से दूसरे अस्पतालों या दूर के संस्थानों पर निर्भर न रहना पड़े।












